नई दिल्ली, 15 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक बड़े कथित घोटाले का मामला सामने आया है। राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया है कि प्रदेश में करीब 15 हजार ऐसे लोगों के नाम पर फसल बीमा कराया गया, जिनके पास एक इंच भी कृषि भूमि नहीं है। इन फर्जी मामलों के जरिए करीब 1150 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम पास करवाए जाने का आरोप लगाया गया है।
सालासर SBI शाखा में 71 संदिग्ध मामले
कृषि मंत्री शुक्रवार को चूरू जिले के सालासर स्थित State Bank of India की शाखा पहुंचे, जहां उन्होंने फसल बीमा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। मीणा के अनुसार, केवल इसी शाखा में 71 ऐसे संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें बीमा प्रीमियम ऐसे लोगों के नाम पर काटा गया जो किसान ही नहीं हैं।
इन मामलों में प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर लगभग 12-12 लाख रुपये, यानी कुल मिलाकर करीब 9 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम का भुगतान प्रस्तावित था। अनियमितताएं सामने आने के बाद इन सभी भुगतानों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
15 हजार से ज्यादा फर्जी बीमा, FIR की तैयारी
एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंत्री मीणा ने कहा कि “किसानों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
उनका आरोप है कि राजस्थान भर में सरकारी और निजी बैंकों, बीमा कंपनियों के एजेंटों और कथित बीमा माफिया की मिलीभगत से फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी जमाबंदी और खसरा नंबर दर्ज कर हजारों फर्जी फसल बीमा बनाए गए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संदिग्ध मामलों की विस्तृत जांच कर एफआईआर दर्ज की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को जेल भेजा जाएगा।
किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सालासर में State Bank of India शाखा सहित अन्य सरकारी एवं प्राइवेट बैंकों द्वारा राजस्थान भर में करीब 15,000 से ज्यादा फर्जी फसल बीमा बनाकर करीब 1150 करोड़ का बीमा घोटाला फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी जमा बंदी खसरे अंकित कर 1/2 pic.twitter.com/6BFuVjJBoF
— Dr. Kirodi Lal Meena (@DrKirodilalBJP) February 13, 2026
किसान और पिता का नाम एक जैसा, जमीन का कोई रिकॉर्ड नहीं
जांच के दौरान सामने आया कि कई मामलों में किसान और उसके पिता का नाम एक ही दर्ज किया गया है। इन लोगों के पास न तो जमाबंदी की प्रति है और न ही किसी खसरा नंबर का वैध रिकॉर्ड।
मंत्री के अनुसार, इन कथित किसानों की जमीन बीकानेर जिले के गजनेर क्षेत्र के विभिन्न चकों में दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में वहां उनकी कोई भूमि नहीं है। जब शाखा प्रबंधक से दस्तावेज मांगे गए तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया।
बीमा कंपनी की भूमिका भी सवालों के घेरे में
इस पूरे प्रकरण में केवल बैंक ही नहीं, बल्कि संबंधित बीमा कंपनियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मीणा ने कहा कि बिना उचित सत्यापन के इतने बड़े पैमाने पर क्लेम पास होना सिस्टम की बड़ी चूक या साजिश की ओर इशारा करता है।
उन्होंने दोहराया कि राज्य में फसल बीमा योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहले भी उठा चुके हैं ऐसे मुद्दे
यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सुर्खियों में आए हों। इससे पहले वे नकली खाद और बीज के मामलों में उर्वरक फैक्ट्रियों और बीज कंपनियों पर छापेमारी कर चुके हैं। अब फसल बीमा घोटाले को लेकर उनके ताजा आरोपों से राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना |
| कथित फर्जी किसान | ~15,000 |
| कुल घोटाला राशि | ~₹1150 करोड़ |
| सालासर SBI के संदिग्ध मामले | 71 |
| रोकी गई क्लेम राशि | ~₹9 करोड़ |
| अगला कदम | FIR और विस्तृत जांच |
किसानों के हितों पर बड़ा सवाल
राजस्थान में सामने आया यह कथित फसल बीमा घोटाला न केवल किसानों के हितों पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बैंकिंग और बीमा व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश के सबसे बड़े कृषि बीमा घोटालों में से एक होगा। अब सबकी नजरें जांच एजेंसियों और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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