नई दिल्ली, 28 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में इस बार अच्छी पैदावार ने जहां उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत दी है, वहीं किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भरपूर उत्पादन और पुराने स्टॉक की अधिकता के कारण आलू और प्याज की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। मंडियों में आवक इतनी अधिक है कि थोक भाव कई जगह उत्पादन लागत से भी नीचे पहुंच गए हैं।
आलू की कीमतों में तेज गिरावट
इस बार आलू की फसल अच्छी रहने की उम्मीद है और साथ ही पिछले सीजन का स्टॉक भी बाजार में मौजूद है। ज्यादा आपूर्ति के दबाव में कीमतें तेजी से फिसली हैं।
उपभोक्ता मामलों का विभाग के अनुसार, शुक्रवार को देशभर में आलू का औसत खुदरा भाव ₹21.85 प्रति किलो रहा। यह कीमत एक महीने पहले के मुकाबले करीब 2.5% कम और पिछले साल की तुलना में 11% से ज्यादा सस्ती है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में आलू ₹10–12 प्रति किलो तक बिक रहा है।
मंडियों में थोक भाव लागत से नीचे
दिल्ली की आजादपुर मंडी के ट्रेडर्स ने बताया कि मांग कमजोर और आवक ज्यादा होने से आलू के थोक भाव ₹3–5 प्रति किलो तक गिर गए हैं। कटाई और भंडारण का दौर शुरू होने से जुलाई तक कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है।
आमतौर पर फरवरी में कटाई के बाद आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखकर नवंबर तक बेचा जाता है, लेकिन इस साल स्टॉक जनवरी तक गोदामों में रहा। इससे बाजार में एक साथ बड़ी मात्रा में आलू आ गया।
उत्पादन के आंकड़े
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में आलू उत्पादन 58.1 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि इस साल यह बढ़कर करीब 60 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। पश्चिम बंगाल में 2025-26 के दौरान उत्पादन 14–15 मिलियन टन रहने की संभावना है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा हो सकता है।
प्याज की कीमतें भी लुढ़कीं
आलू के साथ-साथ प्याज की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। देश में प्याज का औसत खुदरा भाव ₹26.96 प्रति किलो रहा, जो एक महीने पहले से 6% और पिछले साल से 27% कम है।
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी के एक अधिकारी के अनुसार, अच्छी फसल और कमजोर निर्यात के चलते प्याज के थोक भाव करीब ₹1,000 प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं, जबकि उत्पादन लागत ₹1,600–1,800 प्रति क्विंटल है।
किसानों को क्यों हो रहा है नुकसान
निर्यात में कमी ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। बांग्लादेश और सऊदी अरब जैसे देश अब खुद उत्पादन बढ़ा रहे हैं, जबकि पाकिस्तान और सूडान से सस्ता प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध है। इससे भारतीय किसानों को बेहतर दाम नहीं मिल पा रहे।
एक्सपर्ट की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को नए निर्यात बाजार तलाशने के साथ-साथ आलू और प्याज के प्रसंस्करण (Processing) और मूल्यवर्धन (Value Addition) पर जोर देना चाहिए। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है और बंपर पैदावार भी संकट नहीं बनेगी।
बंपर उत्पादन ने उपभोक्ताओं को राहत जरूर दी है, लेकिन बिना मजबूत भंडारण, निर्यात और प्रोसेसिंग रणनीति के किसानों की आय पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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