नई दिल्ली, 26 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीदी के लिए मौजूदा तीन महीने की समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है। किसान के पास इतनी लंबी अवधि तक फसल रोककर रखने की क्षमता नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे अधिकतम एक महीने के भीतर एमएसपी पर खरीदी पूरी हो और किसान को तुरंत उचित दाम मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि देर से खरीद या भुगतान की वजह से बिचौलियों द्वारा एमएसपी के नाम पर अनुचित लाभ उठाने की प्रवृत्ति पर अब रोक लगेगी।
भुगतान में देरी पर 12 प्रतिशत ब्याज
बुधवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले के उद्घाटन के दौरान मंत्री ने कहा कि यदि कोई एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, तो उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकारी खातों में किसान का पैसा “पार्क” कर लाभ कमाने की पुरानी व्यवस्था अब नहीं चलेगी। केंद्र सरकार अपनी ओर से भुगतान में देरी नहीं करेगी और यदि राज्य स्तर पर विलंब होता है, तो केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर भी काम किया जा रहा है।
योजनाओं में पारदर्शिता और मॉनिटरिंग पर जोर
कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पॉली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों के लिए केंद्र सरकार 18 से अधिक योजनाओं के तहत राज्यों को संसाधन उपलब्ध करा रही है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल पैसा भेज देना पर्याप्त नहीं है, यह देखना भी जरूरी है कि लाभ वास्तव में किसान तक पहुँचा या नहीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक जिले में सूची में 700 किसानों के नाम होने के बावजूद केवल 158 किसानों को ही मशीनें मिल पाईं। इससे साफ है कि मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम एक जरूरी सुधार है।
केवीके और केसीसी को बनाया जाएगा और प्रभावी
कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) को जिले की सशक्त इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अनुसंधान और खेत के बीच की दूरी कम हो सके।
उन्होंने बताया कि लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत 4 प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर पर ऋण मिल रहा है, लेकिन इसमें देरी अस्वीकार्य है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपेक्षा जताई गई कि केसीसी लोन समय पर और बिना अनावश्यक कागजी कार्रवाई के जारी हों।
खाद सब्सिडी और डीबीटी पर विचार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार खाद पर हर साल 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है, जिससे 2400 रुपये लागत वाली यूरिया की बोरी किसान को लगभग 265–270 रुपये में मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि यह सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के रूप में दी जाए, तो किसान स्वयं तय कर सकेगा कि कौन-सा उर्वरक और कितनी मात्रा में खरीदनी है।
विकसित कृषि संकल्प अभियान
आगे की रणनीति बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीमें अप्रैल से खरीफ सीजन से पहले गांव–गांव जाकर किसानों को नई किस्मों, रोग–कीट प्रबंधन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग और एक्सपोर्ट क्वालिटी फसलों की जानकारी देंगी।
कुल मिलाकर, मंत्री के बयान से साफ संकेत मिलता है कि एमएसपी खरीदी, भुगतान, सब्सिडी और कृषि योजनाओं में पारदर्शिता व समयबद्धता को लेकर केंद्र सरकार अब सख्त और निर्णायक रुख अपनाने जा रही है।
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