किसान आंदोलन के बीच मोदी सरकार ने बढ़ाया गन्ने का मूल्य, 8 फीसदी बढ़ा गन्ना खरीद मूल्य

दिल्ली कूच के लिए किसान तैयार हैं और वहीं सरकार ने किसान संगठनों को पांचवें दौर की बातचीत के लिए बुलाया है। वहीं बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट ने गन्ना खरीद के मूल्य में आठ फीसदी वृद्धि को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने गन्ना खरीद के मूल्य को 315 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल करने की मंजूरी दी है। इस तरह गन्ने के दाम में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10 सालों से किसानों के कल्याण के लिए काम किया है। 2014 से पहले किसानों को खाद के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ता था। उस समय गन्ने का दाम सही नहीं था। मुझे दो साल इंतजार करना पड़ा। लेकिन मोदी सरकार ने इस दिशा में बेहतरीन काम किया है। ठाकुर ने कहा कि गन्ना किसानों को 2019-20. से 2020-21 में 75,854 करोड़ रुपये मिले, 93,011 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। 2021-22 में किसानों को 1.28 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं, 2022-23 में 1.95 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। यह पैसा सीधे उनके खाते में भेजा जाता था। हम किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मोदी सरकार देगी पशु बीमा को बढ़ावा

वहीं अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला है कि राष्ट्रीय पशुधन के तहत एक सब स्कीम शुरू की जा रही है। इससे घोड़े, ऊंट, गधे, खच्चरों की संख्या कम हो रही है और देशी नस्ल की प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसलिए पशुओं को बचाने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक एक्सचेंज चलाया जा रहा है। नस्ल बहुनिर्धारण पर काम किया जा रहा है। उद्यमी के रूप में व्यक्ति बनें, स्वयं सहायता समूह हों, इन सभी को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई है। इसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये रखी गई है।

उन्होंने बताया कि घोड़े, ऊंट, , गधे, खच्चर के लिए नस्ल बहुनिर्धारण का कार्य किया जाएगा। चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निम्नीकृत वन भूमि का उपयोग चारा उत्पादन में किया जाएगा। इसके लिए सब्सिडी भी दी जाएगी। सभी प्रकार के पशुधन को बीमा का लाभ मिलेगा। सभी को एक ही प्रीमियम देना होगा। पहले 20 से 50 फीसदी प्रीमियम देना होता था, अब 15 फीसदी देना होगा। अनुसंधान एवं विकास के लिए चैलेंज पद्धति के आधार पर निजी संस्थानों को अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।

बाढ़ प्रबंधन को बनाया है कार्यक्रम

अनुराग ठाकुर ने कहा कि तीसरा बड़ा फैसला बाढ़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्र कार्यक्रम को लेकर है। इस कार्यक्रम को 4100 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है, 2021-22 से 2025-26 तक बाढ़ प्रबंधन के लिए 2,930 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसका फंडिंग पैटर्न 60:40 रेशियो का होगा। केंद्र 60 प्रतिशत देगा जबकि शेष राज्य सरकार देगी।

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