नई दिल्ली, 25 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): Jute MSP News- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गठित आर्थिक कार्य मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से देश के जूट उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य जूट के अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित करता है। सरकार का यह निर्णय बजट 2018-19 में घोषित उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसमें फसलों का एमएसपी उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना तय करने की बात कही गई थी।
कच्चे जूट का एमएसपी: तुलना
| विपणन सत्र | एमएसपी (₹/क्विंटल) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| 2014-15 | 2,400 | — |
| 2025-26 | 5,650 | — |
| 2026-27 | 5,925 | +275 |
2014 से अब तक 2.5 गुना बढ़ा एमएसपी
सरकार ने 2014-15 में कच्चे जूट का एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, जिसे अब बढ़ाकर 5,925 रुपये कर दिया गया है। यानी 12 वर्षों में 3,525 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जो करीब 2.5 गुना बढ़ोतरी को दर्शाती है। यह बढ़ोतरी जूट उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एमएसपी भुगतान में भी बड़ा इजाफा
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान जूट किसानों को एमएसपी के तहत कुल 1,342 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके मुकाबले वर्ष 2004-05 से 2013-14 के बीच यह राशि सिर्फ 441 करोड़ रुपये थी। इससे साफ है कि हाल के वर्षों में जूट किसानों को सरकारी समर्थन कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
JCI निभाएगा अहम भूमिका
मूल्य समर्थन संचालन के लिए भारतीय जूट निगम (JCI) केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमएसपी संचालन के दौरान यदि जूट निगम को किसी भी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी पूरी भरपाई केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।
कुल मिलाकर, कच्चे जूट के एमएसपी में यह बढ़ोतरी किसानों के लिए भरोसे का संकेत है और जूट उत्पादन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाली साबित हो सकती है।