नई दिल्ली, 30 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में शुक्रवार को दबाव देखने को मिला, जहां मजबूत डॉलर और मुनाफावसूली के चलते भाव फिसले। इसके बावजूद, सोना 1980 के बाद अपने सबसे बड़े मंथली गेन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लगातार छठे महीने बढ़त दर्ज करने की दहलीज़ पर खड़ा सोना एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का हाजिर भाव 0.9% गिरकर 5346.42 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। कारोबार के दौरान इसमें 4.6% तक की तेज गिरावट भी देखी गई और भाव 5149.99 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गए थे। हालांकि, बाद में बाजार में खरीदारी लौटने से कीमतों में सुधार हुआ। एक दिन पहले ही सोना 5594.82 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा था।
इस साल जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में 24% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। फरवरी डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.3% चढ़कर 5390.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए, जो निवेशकों की मजबूत धारणा को दर्शाता है।
चांदी ने बनाया रिकॉर्ड
कीमती धातुओं में चांदी ने इस महीने सबसे ज्यादा चौंकाया है। वैश्विक बाजार में चांदी का हाजिर भाव 0.2% गिरकर 115.83 डॉलर प्रति औंस पर रहा, जबकि दिन के दौरान इसमें 6.6% तक की गिरावट आकर यह 108.84 डॉलर तक भी फिसली थी। हालांकि, गुरुवार को चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंची थी।
पूरे महीने की बात करें तो चांदी में अब तक 62% की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है, जो इसे इतिहास की सर्वश्रेष्ठ मासिक परफॉरमेंस की ओर ले जा रही है।
भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी चमक
विश्लेषकों के मुताबिक, सोने-चांदी में यह तेजी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं से भी जुड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं ने निवेशकों को सेफ-हेवन एसेट्स की ओर मोड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान—जिसमें उन्होंने एक और संभावित युद्ध की आशंका जताई—ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
आगे कहां तक जा सकता है सोना
बड़े निवेश बैंक और ब्रोकरेज हाउस सोने के भविष्य को लेकर बेहद बुलिश नजर आ रहे हैं। UBS ने मार्च, जून और सितंबर 2026 के लिए सोने का लक्ष्य बढ़ाकर 6200 डॉलर प्रति औंस कर दिया है, जो पहले 5000 डॉलर था।
सोसाइटी जेनरल का अनुमान है कि साल के अंत तक सोना 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जबकि मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि बुल केस में यह 5700 डॉलर प्रति औंस तक की रैली दिखा सकता है।
कुल मिलाकर, अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना और चांदी दोनों ही वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में निवेशकों के भरोसेमंद ठिकाने बने हुए हैं।
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