नई दिल्ली, 24 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): कुछ महीनों पहले तक देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को लेकर तीखी बहस चल रही थी। गाड़ियों के माइलेज, मेंटेनेंस और ‘फूड बनाम फ्यूल’ जैसे मुद्दों पर सरकार और खासकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की आलोचना हो रही थी। इसके चलते पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20% (E20) तक सीमित रह गया और आगे के विस्तार को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई।
लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव और खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में बाधा ने तस्वीर बदल दी है। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40% की तेजी ने भारत की आयात निर्भरता को फिर से केंद्र में ला दिया है।
इथेनॉल है भविष्य का ईंधन
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि पिछले एक दशक में इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग में ऐतिहासिक प्रगति हुई है।
उन्होंने बताया पहले इथेनॉल ब्लेंडिंग 1–1.5% तक सीमित थी लेकिन अब देश 20% ब्लेंडिंग के करीब पहुंच चुका है। इससे हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल तेल आयात में कमी आई
प्रधानमंत्री का यह बयान उद्योग के लिए स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि सरकार वैकल्पिक ईंधनों को प्राथमिकता देती रहेगी।
E20 से आगे: अब E30 की मांग क्यों तेज?
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) और अन्य उद्योग संगठनों ने सरकार से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 30% (E30) तक बढ़ाने की मांग की है।
मुख्य प्रस्ताव:
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा
- घरेलू और औद्योगिक कुकिंग में इथेनॉल उपयोग
- डीजल में भी इथेनॉल मिश्रण बढ़ाना
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता E20 से कहीं ज्यादा ब्लेंडिंग को सपोर्ट कर सकती है।

आंकड़ों में इथेनॉल का असर
| अवधि | उपलब्धि |
|---|---|
| 2014–2025 | 277 लाख टन कच्चे तेल का आयात कम |
| विदेशी मुद्रा बचत | ₹1.63 लाख करोड़ से अधिक |
| वर्तमान क्षमता | 2000 करोड़ लीटर/वर्ष |
| E20 की जरूरत | ~1100 करोड़ लीटर |
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के पास इथेनॉल उत्पादन की पर्याप्त क्षमता है, जिसे अभी पूरी तरह उपयोग नहीं किया जा रहा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बल
इथेनॉल उद्योग केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए भी अवसर पैदा कर रहा है। अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त बाजार और बेहतर आय मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नीति समर्थन जारी रहा, तो यह सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
संकट में अवसर: नीति बदलाव का सही समय
केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इसे “संकट में अवसर” बताते हुए कहा कि यह समय इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में सुधारों को तेज करने का है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी सरकार से E20 से आगे बढ़ने के लिए एक स्पष्ट और तेज रोडमैप की मांग की है।
क्या है EBP?
इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात को कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। 2025-26 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए गन्ने, टूटे चावल और मक्का का उपयोग किया जा रहा है।
इस मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत, पर्यावरण संरक्षण, और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के गुड़ (molasses), टूटे हुए चावल, मक्का और अन्य स्टार्च युक्त उत्पादों से किया जाता है।
क्या भारत E30 के लिए तैयार है?
ऊर्जा संकट, बढ़ती तेल कीमतें और मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता—ये तीनों कारक इशारा कर रहे हैं कि भारत अब E20 से आगे बढ़ सकता है।
हालांकि, इसके लिए जरूरी होगा वाहन तकनीक का तेजी से अनुकूलन, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और नीति स्तर पर स्पष्ट रोडमैप। फिलहाल, इतना तय है कि इथेनॉल अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
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