ठाणे, 22 सितंबर:
मराठवाड़ा में हुई भीषण अतिवृष्टि और बाढ़ की परिस्थितियों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज स्वयं गंभीरता से समीक्षा की। उन्होंने मराठवाड़ा के सभी प्रभावित जिल्हों के जिल्हाधिकारियों से सीधे फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने स्पष्ट कहा कि बाढ़ के पानी में फंसे प्रत्येक नागरिक की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित प्रशासन को तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के आदेश दिए। साथ ही उन्होंने राज्य आपत्ती प्रबंधन विभाग, मुख्य सचिव और प्रधान सचिव से भी बात कर बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए।
मराठवाड़ा में बीड, धाराशिव, लातूर, परभणी और हिंगोली जिलों में लगातार भारी वर्षा के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कों पर पानी भर गया है, गांव-गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और कई स्थानों पर नागरिक सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में असमर्थ हो गए हैं। इस गंभीर परिस्थिति पर नजर रखते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने प्रशासन से कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को असुरक्षित न छोड़ा जाए।
धाराशिव जिले के परंडा तालुका में स्थित ढगपिंपरी गांव के नागरिकों के बाढ़ के पानी में फंसे होने की जानकारी मिलते ही उपमुख्यमंत्री ने तुरंत जिल्हाधिकारी से संपर्क साधा। उन्होंने आदेश दिया कि एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को मौके पर भेजा जाए और हेलिकॉप्टर की मदद से नागरिकों को एयरलिफ्ट (Airlift) कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। शिंदे ने स्पष्ट कहा कि राहत कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी और प्रशासन को 24 घंटे सक्रिय रहना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी भी जिले को अतिरिक्त सहायता, साधन या बल की आवश्यकता हो तो तुरंत राज्य सरकार से संपर्क किया जाए। हर एक जिले की स्थिति की जानकारी समय-समय पर राज्य स्तर तक पहुंचनी चाहिए, ताकि आवश्यक कदम त्वरित रूप से उठाए जा सकें।
मराठवाड़ा में लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में फसलें जलमग्न हो गई हैं, पशुधन को खतरा पैदा हो गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन ठप पड़ गया है। कई घरों में पानी घुसने से लोग बेघर हो गए हैं। ऐसी परिस्थिति में उपमुख्यमंत्री शिंदे का यह कदम स्थानीय नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है।
उन्होंने जिल्हाधिकारियों से कहा कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहले प्राथमिकता से बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही सुरक्षित स्थानों पर भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने आपत्ती प्रबंधन दल को स्पष्ट किया कि राहत कार्यों में तेजी लाना ही फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य है।
मराठवाड़ा में इस समय जनजीवन अस्त-व्यस्त है, कई गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और लोग खुले आसमान के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। इस बीच उपमुख्यमंत्री द्वारा की गई त्वरित समीक्षा और सख्त निर्देश से उम्मीद है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे और नागरिकों को शीघ्र राहत मिलेगी।
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