नई दिल्ली, 08 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर अमेरिका के बढ़ते नियंत्रण के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। ट्रेडर्स को यह अंदाज़ा होने लगा है कि अमेरिका न केवल वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री पर लंबे समय तक नियंत्रण रख सकता है, बल्कि सप्लाई चैन पर भी सख्ती बढ़ा सकता है। इसी उम्मीद ने तेल बाजार में हालिया गिरावट के बाद रिकवरी को समर्थन दिया।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) पिछले दो सत्रों में करीब 4 फीसदी टूटने के बाद लगभग 56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर से नीचे सेटल हुआ। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में यह स्थिरता सप्लाई से जुड़े भू-राजनीतिक संकेतों की वजह से आई है।
अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा कि अमेरिका पहले स्टोरेज में मौजूद कच्चे तेल को बाजार में उतारेगा और इसके बाद वेनेजुएला से आने वाली सप्लाई की बिक्री करेगा। एनर्जी डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस तेल की मार्केटिंग प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
इस बीच, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी ने कहा है कि वह देश में काम करने वाली एकमात्र बड़ी अमेरिकी कंपनी शेवरॉन कॉर्प के साथ एक फ्रेमवर्क जैसे अरेंजमेंट के तहत वॉशिंगटन से बातचीत कर रही है, ताकि कच्चे तेल की बिक्री को आगे बढ़ाया जा सके।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला की जर्जर एनर्जी इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा करने के लिए अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बना रहे हैं। सालों की अनदेखी के बाद देश का तेल सेक्टर बुरी हालत में है। इसी सिलसिले में ट्रंप शुक्रवार को एनर्जी सेक्टर के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं। प्रशासन ने इस प्रक्रिया के तहत वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनिंदा तरीके से वापस लेना शुरू कर दिया है।
अमेरिका स्थित रिफाइनर सिटगो पेट्रोलियम कॉर्प, जो वेनेजुएला की अप्रत्यक्ष रूप से स्वामित्व वाली कंपनी है, 2019 में प्रतिबंधों के कारण सप्लाई बंद होने के बाद पहली बार दोबारा खरीदारी शुरू करने पर विचार कर रही है। वहीं, कमोडिटी ट्रेडर ट्रैफिगुरा ग्रुप ने भी वेनेजुएला के कच्चे तेल में दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा, शेवरॉन अमेरिका से अपने ऑपरेटिंग लाइसेंस को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रही है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला की सप्लाई पर नियंत्रण बनाए रखता है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, जो शॉर्ट टर्म में कीमतों को सपोर्ट दे सकती है।
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