नई दिल्ली, 05 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): US और ईरान के बीच ओमान में होने वाली बातचीत से पहले गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में दबाव देखने को मिला। बातचीत के एजेंडे को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन डिप्लोमैटिक चैनल खुले रहने से बाजार की चिंताएं कुछ हद तक कम हुई हैं। इसी वजह से बुधवार की तेज तेजी के बाद गुरुवार को मुनाफावसूली का दबाव नजर आया।
US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2347 GMT पर 0.7 सेंट यानी करीब 1% की गिरावट के साथ $64.5 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0100 GMT पर दोबारा ट्रेडिंग के लिए खुलने वाले थे।
एक दिन पहले क्यों उछली थीं कीमतें?
बुधवार को तेल की कीमतों में करीब 3% की तेजी दर्ज की गई थी। इसकी वजह एक मीडिया रिपोर्ट रही, जिसमें कहा गया था कि शुक्रवार को प्रस्तावित US-ईरान बातचीत विफल हो सकती है। इस खबर से मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी और कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि अब बातचीत होने पर सहमति बनने से बाजार का रुख फिर बदला है और जोखिम प्रीमियम में कुछ कमी आई है।
बातचीत में क्या है दांव पर?
ईरान पश्चिमी देशों के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे न्यूक्लियर विवाद पर चर्चा करना चाहता है। वहीं अमेरिका इस बातचीत में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, मिडिल ईस्ट में उसके समर्थित सशस्त्र प्रॉक्सी ग्रुप्स और घरेलू मानवाधिकार मुद्दों को भी शामिल करना चाहता है। इन मतभेदों के चलते बातचीत आसान नहीं मानी जा रही, लेकिन इसके बावजूद बाजार फिलहाल किसी बड़े टकराव की आशंका को थोड़ा कम आंक रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और जियोपॉलिटिकल रिस्क
US-ईरान तनाव इसलिए भी फोकस में है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले OPEC सदस्य ईरान पर कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं तो तेल-समृद्ध मिडिल ईस्ट में बड़े टकराव का खतरा पैदा हो सकता है, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
एक्सपर्ट की राय
IG के मार्केट एनालिस्ट टोनी साइकामोर के मुताबिक, बातचीत पूरी तरह फेल होने का डर फिलहाल कम हुआ है और इसी वजह से तेल की कीमतों में नरमी आई है। उनका मानना है कि जब तक बातचीत जारी रहती है, तब तक बाजार में तेज उछाल की संभावना सीमित रहेगी।
डॉलर की मजबूती ने भी बढ़ाया दबाव
तेल की कीमतों पर दबाव डालने वाला एक और बड़ा फैक्टर डॉलर की मजबूती रहा। डॉलर इंडेक्स 0.25% बढ़कर 97.65 पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में भुगतान करने वाले खरीदारों के लिए डॉलर-डिनॉमिनेटेड कच्चा तेल महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45