मुंबई, 02 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो):
भारतीय मसाला बाज़ार में इन दिनों इलायची के भाव में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। प्रमुख उत्पादक राज्यों—केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक से नई फसल की आवक बढ़ने लगी है, जबकि घरेलू और निर्यात मांग में अपेक्षाकृत नरमी ने कीमतों पर दबाव बना दिया है।
इलायची, जिसे ‘मसालों की रानी’ कहा जाता है, आमतौर पर त्योहारी सीजन और खाड़ी देशों से निर्यात मांग में इज़ाफ़े के चलते ऊँचे दामों पर बिकती है। लेकिन अगस्त की शुरुआत तक बाजार में 6-8% की गिरावट दर्ज की गई है। कोच्चि मसाला मंडी में 8 मिमी और उससे अधिक आकार की इलायची की कीमतें ₹2,100–₹2,400 प्रति किलोग्राम तक आ चुकी हैं, जबकि जुलाई मध्य में यह दरें ₹2,500–₹2,800 प्रति किलोग्राम तक थीं।
इलायची बाज़ार – मूल्य एवं आपूर्ति स्थिति (जुलाई–अगस्त 2025)
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इलायची व्यापार में दशकों से जुड़े एक मसाला व्यापारी ने बताया, “नई कटाई शुरू हो गई है, जिससे मंडियों में आपूर्ति बढ़ी है। वहीं, खाड़ी देशों से निर्यात ऑर्डर फिलहाल धीमे हैं और घरेलू उपभोक्ता भी अभी बड़े पैमाने पर खरीदारी नहीं कर रहे।” व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि अगर खरीफ सीज़न में मानसून सामान्य रहता है और उत्पादन में सुधार होता है, तो भाव में और गिरावट संभव है। हालांकि, त्योहारी सीज़न (सितंबर से नवंबर) के करीब आते-आते मांग में तेज़ी आने की उम्मीद की जा रही है।
इधर इलायची उत्पादक किसान, खासकर इडुक्की और वायनाड जिलों के, गिरते हुए दामों से चिंतित हैं। उनका कहना है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।
बाजार की मौजूदा स्थिति आपूर्ति और मांग के असंतुलन की परिचायक है। आने वाले हफ्तों में घरेलू उपभोग, निर्यात ऑर्डर और मौसम की स्थिति जैसे कारक इलायची की कीमतों को दिशा देंगे।
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