नई दिल्ली, 29 जुलाई (कृषि भूमि डेस्क):
भारतीय मसाला बाजार में हल्दी की कीमतें इस सप्ताह की शुरुआत में स्थिर से लेकर कमजोर रुख के साथ कारोबार करती दिखीं। हालांकि वायदा बाजार में दबाव बना रहा और हल्दी वायदा कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। कमजोर घरेलू मांग और पर्याप्त आपूर्ति ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
हाजिर बाजार की स्थिति
प्रमुख मंडियों — नांदेड़, इरोड और निजामाबाद — में हल्दी के हाजिर भाव में कोई ख़ास तेजी नहीं देखी गई। नांदेड़ मंडी में अच्छी क्वालिटी की हल्दी ₹13,200 से ₹13,800 प्रति क्विंटल के दायरे में बिकी, जबकि इरोड में सामान्य किस्म ₹12,500 से ₹13,000 प्रति क्विंटल पर स्थिर रही।
व्यापारियों के अनुसार, खरीदारों की सुस्ती और मिलों की ओर से सीमित उठाव के चलते कीमतों में कोई मजबूती नहीं दिख रही है। “मौजूदा स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और खरीदार नए ऑर्डर देने में हिचक रहे हैं,” एक प्रमुख व्यापारी ने कहा।
वायदा बाजार में गिरावट
एनसीडीईएक्स (NCDEX) पर अक्टूबर डिलीवरी हल्दी वायदा सोमवार को ₹80 की गिरावट के साथ ₹15,100 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। यह पिछले सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹15,600 से लगभग ₹500 नीचे आ चुका है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि तकनीकी संकेतक कमजोर बने हुए हैं और ट्रेंड अब मंदी की ओर झुका है।
विश्लेषकों के अनुसार, “अगर ₹15,000 का सपोर्ट स्तर टूटता है, तो आगे और गिरावट की संभावना बन सकती है।” कमजोर मांग और पर्याप्त इन्वेंट्री के चलते सटोरियों का रुझान भी बिकवाली की ओर बना हुआ है।
बाजार पर असर डालने वाले कारक
- खपत में गिरावट: घरेलू स्तर पर हल्दी की मांग आमतौर पर मानसून के बाद बढ़ती है, लेकिन इस वर्ष थोक खरीदारों की ओर से उठाव कमजोर बना हुआ है।
- बंपर स्टॉक: पिछले वर्ष के रिकॉर्ड उत्पादन के चलते मंडियों में स्टॉक का दबाव बना हुआ है।
- निर्यात मांग भी धीमी: निर्यात ऑर्डर सीमित हैं और वैश्विक खरीदार भी कीमतों में गिरावट की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आगे का रुझान
अगस्त-सितंबर में त्योहारी मांग के चलते कीमतों में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन तब तक वायदा बाजार में दबाव बना रह सकता है। ट्रेडर्स अब सरकारी आंकड़ों और खरीफ उत्पादन अनुमान की ओर नजर लगाए हुए हैं।
हल्दी बाजार फिलहाल संतुलन की तलाश में है। हाजिर भावों में ठहराव है जबकि वायदा बाजार में दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि मांग में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
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