लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल इसकी कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चीनी की उपलब्धता की जानकारी मांगे जाने के बाद चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने अधिकारियों से आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे चीनी की कमी को लेकर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें।
सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक, बाजार में आपूर्ति और थोक व खुदरा कीमतों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि मांग बढ़ने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को चीनी खरीदने में परेशानी न हो।
प्रदेश के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में फिलहाल कुल 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें सहकारी चीनी मिलों, निगम की मिलों और निजी क्षेत्र की मिलों में रखा गया भंडार शामिल है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सहकारी चीनी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल चीनी है। वहीं, निगम की चीनी मिलों में 2.93 लाख क्विंटल स्टॉक मौजूद है। निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के पास 54.3 लाख क्विंटल से अधिक चीनी उपलब्ध बताई गई है।
सरकार के अनुसार, यह स्टॉक प्रदेश में चीनी की मौजूदा उपलब्धता को दर्शाता है। हालांकि, त्योहारों के दौरान मांग और आपूर्ति की स्थिति बनाए रखने के लिए अधिकारियों को नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा नया पेराई सत्र
प्रदेश में चीनी की उपलब्धता को लेकर सरकार को आगामी पेराई सत्र से भी राहत मिलने की उम्मीद है। विभाग की जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह से चीनी मिलों के दोबारा चालू होने की संभावना है।
इसके बाद नवंबर में नए पेराई सत्र 2026-27 की चीनी बाजार में आने लगेगी। इससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक को बढ़ाने और मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
नई चीनी की उपलब्धता त्योहारों के आसपास बाजार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति मिलों के संचालन और उत्पादन पर निर्भर करेगी।
चीनी की कीमतों पर रहेगी प्रशासन की नजर
चीनी की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी कीमतों को नियंत्रित रखना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक कर देशभर में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में बुधवार को राज्य की गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने और बाजार में कीमतों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मिलों में उपलब्ध चीनी की निकासी और बाजार में उसकी आपूर्ति सुचारु रूप से हो रही है या नहीं। साथ ही, कीमतों में किसी असामान्य बढ़ोतरी की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी।
जिलाधिकारियों को पत्र, बनेंगी विशेष जांच टीमें
गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर चीनी की उपलब्धता और कीमतों की निगरानी करने का अनुरोध किया है। इसमें जिलों की चीनी मिलों से होने वाली निकासी, बाजार में स्टॉक की स्थिति और थोक व खुदरा कीमतों की नियमित समीक्षा शामिल है।
इसके अलावा, विभागीय स्तर पर विशेष टीमें गठित कर बाजारों और चीनी मिलों में भौतिक जांच किए जाने की योजना है। इन टीमों के माध्यम से उपलब्ध स्टॉक और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सरकार का संदेश?
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की खपत में भी इजाफा हो सकता है। ऐसे में सरकार पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के साथ बाजार में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है।
फिलहाल, विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में चीनी की कमी नहीं है। उपभोक्ताओं को अफवाहों के आधार पर घबराकर खरीदारी करने से बचना चाहिए। वहीं, प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों से स्पष्ट होगा।
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