पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, महंगाई और राजनीति दोनों गरमाईं
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी के बाद आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। यह पिछले करीब चार वर्षों में सबसे बड़ी ईंधन मूल्य वृद्धि मानी जा रही है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और बढ़ती अंडर-रिकवरी के चलते यह फैसला लेना जरूरी हो गया था। वहीं विपक्षी दलों ने इसे आम आदमी पर “महंगाई का नया बोझ” करार दिया है।
आखिर क्यों बढ़े ईंधन के दाम?
पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन को लेकर चिंताओं के कारण Brent Crude की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने और क्रूड महंगा होने का सीधा असर घरेलू फ्यूल कीमतों पर पड़ता है। तेल कंपनियां पिछले कई महीनों से रिटेल कीमतों को स्थिर रखे हुए थीं, लेकिन बढ़ती लागत और नुकसान के बाद अब कीमतें बढ़ानी पड़ीं।
Petrol-Diesel Price Hike: नई कीमतों का असर
| ईंधन | पुरानी कीमत | नई कीमत | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹94.77 | ₹97.77 | ₹3.00 |
| डीजल | ₹87.67 | ₹90.67 | ₹3.00 |
Petrol-Diesel Price Hike: अलग-अलग राज्यों में वैट और स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थ, सब्जियां, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
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आम लोगों में नाराज़गी
Petrol-Diesel Price Hike: ईंधन महंगा होने के बाद कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों ने नाराज़गी जाहिर की। सोशल मीडिया पर भी #FuelPriceHike ट्रेंड करता रहा।
दिल्ली के एक ऑटो चालक ने कहा कि पहले से ही कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाना मुश्किल था, अब ईंधन महंगा होने से बचत लगभग खत्म हो जाएगी। वहीं डिलीवरी और कैब सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के बावजूद उनकी आय में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मध्यम वर्गीय परिवारों में भी चिंता बढ़ी है। लोगों का मानना है कि अगर ईंधन कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो घरेलू बजट पर और दबाव पड़ेगा।
Petrol-Diesel Price Hike: विपक्ष ने सरकार को घेरा
Petrol-Diesel Price Hike के मुद्दे पर इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों का हवाला देकर आम जनता पर बोझ डाल रही है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने तंज कसते हुए कहा कि “अबकी बार पेट्रोल 100 पार” की स्थिति बन गई है। कई विपक्षी नेताओं ने केंद्र से एक्साइज ड्यूटी में फिर कटौती करने की मांग भी की है।
विपक्ष का तर्क है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे थीं तब टैक्स कम नहीं किए गए, लेकिन अब कीमतें बढ़ने का पूरा असर उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
सरकार और कंपनियों की दलील
सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक लंबे समय से कीमतें नियंत्रित रखी गई थीं, जबकि वैश्विक बाजार में लगातार तेजी बनी हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनियों को हर महीने भारी अंडर-रिकवरी झेलनी पड़ रही थी।
विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के सामने भी चुनौती आसान नहीं है। एक तरफ राजकोषीय दबाव और आयात लागत है, दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई और जनता की नाराज़गी।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी (Petrol-Diesel Price Hike) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि अगर वैश्विक बाजार स्थिर होता है और कच्चे तेल में नरमी आती है तो सरकार टैक्स राहत या कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर सकती है।
फिलहाल, ईंधन की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता को फिर से केंद्र में ला दिया है और इसका असर आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीति तक कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
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