लखनऊ, 10 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): बेमौसम बारिश से फसल नुकसान ने बधाई किसानों की चिंता – उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गेहूं सहित कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रदेश के अन्नदाताओं के सामने संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकार ने राहत कार्यों में तेजी ला दी है।
फसल नुकसान: 9 जिलों का हवाई सर्वे
स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए गुरुवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नौ प्रभावित जिलों की स्थिति का जायजा लिया। सरकारी दल ने बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, उन्नाव और लखनऊ जनपदों के ऊपर से उड़ान भरी और खेतों में फसलों की स्थिति को देखा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का वास्तविक आकलन करना है ताकि कोई भी प्रभावित किसान मदद से वंचित न रहे।
किसानों को दिया भरोसा
हवाई सर्वे के बाद दोनों मंत्रियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित किसान को राहत से वंचित नहीं रखा जाएगा।
मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है कि हर प्रभावित किसान तक जल्द से जल्द आर्थिक सहायता पहुंचे और उसकी भरपाई हो सके।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
सर्वेक्षण के बाद आजमगढ़ और फतेहपुर में समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:
- फसल नुकसान का पारदर्शी और त्वरित आकलन
- रिपोर्ट तैयार करने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतना
- प्रभावित किसानों की सूची का सही संकलन
फसल नुकसान: जल्द मिलेगा मुआवजा
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द फसल नुकसान सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजें। रिपोर्ट मिलते ही राहत राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि फसल नुकसान मुआवजा प्रक्रिया में कोई देरी न हो और किसानों को समय पर सहायता मिले।
प्रदेश सरकार अब डिजिटल सर्वे, ड्रोन तकनीक और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से फसल नुकसान का विस्तृत आंकलन करने की तैयारी में है। इससे भविष्य में आपदा प्रबंधन और राहत वितरण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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