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इफको को मिली बड़ी मंजूरी: नैनो NPK उर्वरकों को FCO से हरी झंडी, खेती में आएगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली, 19 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको (IFFCO) ने नैनो उर्वरक तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के स्वदेशी नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके दानेदार (20-10-10) को फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO) के तहत मंजूरी मिल गई है।

इस संबंध में अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में जारी की गई है, जिससे इन उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ हो गया है।

इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल ने इस उपलब्धि को नैनो नवाचार की दिशा में “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल इफको बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और भारत को वैश्विक स्तर पर नैनो उर्वरक तकनीक में अग्रणी बनाता है।

संतुलित पोषण की दिशा में नया समाधान

इफको द्वारा विकसित ये नैनो उर्वरक फसलों को संतुलित पोषण देने के लिए तैयार किए गए हैं। नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) को पत्तियों पर छिड़काव यानी फोलियर एप्लिकेशन के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि नैनो एनपीके दानेदार (20-10-10) मिट्टी और जड़ों के माध्यम से पोषण देने में मदद करता है।

दोनों उत्पाद मिलकर फसलों को उनकी जरूरत के अनुसार सटीक पोषण उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी

इन नैनो फॉर्मूलेशन से खेती में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के मुकाबले इनका उपयोग कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम दे सकता है। इससे किसानों की लागत घटेगी और उन्हें बेहतर उपज के साथ उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन मिलेगा।

साथ ही, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और पर्यावरण पर कम असर जैसे फायदे भी सामने आएंगे।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

वैश्विक स्तर पर उर्वरक सप्लाई चेन में चल रही अनिश्चितताओं के बीच यह उपलब्धि भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इफको का कहना है कि यह पहल आत्मनिर्भरता और सहकारिता के विजन के अनुरूप है। संस्था भविष्य में भी किसानों के लिए आधुनिक, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

आगे क्या असर होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो उर्वरकों का बढ़ता उपयोग भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बना सकता है। यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा देगी।

आने वाले समय में यह नवाचार कृषि क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।

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