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आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से हाहाकार: 4 की मौत, 10 लोग अस्पताल में भर्ती

हैदराबाद, 24 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के राजामहेंद्रवरम (राजामुंद्री) कस्बे में मिलावटी दूध पीने से पिछले 48 घंटों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह दूध एक अवैध विक्रेता द्वारा सप्लाई किया जा रहा था, जिसकी पुष्टि शुरुआती जांच में हुई है।

पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर निजी डेयरी संचालक को हिरासत में ले लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।

बीमारी के लक्षण और मौतों का सिलसिला

पूर्वी गोदावरी जिले के पुलिस अधीक्षक डी नरसिम्हा किशोर के अनुसार, चौदेश्वरी नगर इलाके में 16 फरवरी से लोगों में पेशाब न आना (एनुरिया), उल्टी, पेट दर्द और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आने लगी थीं। स्थिति तब गंभीर मानी गई जब रविवार को दो मरीजों की मौत हो गई और इसके बाद मामला सार्वजनिक हुआ।

मृतकों की पहचान इस प्रकार की गई है:

मृतक का नाम आयु मृत्यु का दिन
एन शेषागिरी राव 72 वर्ष सोमवार
राधाकृष्ण मूर्ति 74 वर्ष सोमवार
ताड़ी कृष्णावेनी 76 वर्ष रविवार
ताड़ी रमानी 58 वर्ष रविवार

सभी मृतक चौदेश्वरी नगर क्षेत्र के निवासी थे।

विधानसभा में उठा मामला, सीएम नायडू का बड़ा ऐलान

राज्य विधानसभा में इस घटना पर बयान देते हुए मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि कई पीड़ित उल्टी, पेट दर्द और किडनी से जुड़ी समस्याओं के साथ अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से दो की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पीड़ितों के सैंपल जांच के लिए हैदराबाद और विशाखापत्तनम की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये प्रति परिवार की अनुग्रह राशि देने और सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की।

डेयरी से जुड़ा कनेक्शन, सप्लायर हिरासत में

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कोरुकोंडा मंडल के नरसपुरम गांव में स्थित निजी डेयरी वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी कॉलोनी के 106 घरों में नियमित रूप से दूध सप्लाई कर रही थी। जांच में सामने आया कि सभी बीमार लोगों ने इसी डेयरी का दूध सेवन किया था।

पुलिस ने डेयरी संचालक अड्डला गणेश्वर राव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और अवैध डेयरी यूनिट को सील कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मिलावट की पुष्टि होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की अपील: घबराएं नहीं

जिला कलेक्टर कीर्ति चेकुरी ने जनता से घबराने से बचने की अपील की है। उन्होंने बताया कि रैपिड रिस्पॉन्स टीमें प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वे कर रही हैं और अब तक 73 परिवारों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं।

पशुपालन विभाग ने 46 पशुओं की जांच कर उनके सैंपल वैज्ञानिक और पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं में भेजे हैं। वहीं, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पादों के नमूने भी जांच के लिए भेज दिए हैं।

जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वी. वेंकटेश्वर राव के अनुसार, अस्पताल में भर्ती अधिकांश मरीज 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं। प्रभावित क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं और मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है।

Rajahmundry Milk Tragedy ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और अवैध डेयरी कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दूध में किस तरह की मिलावट की गई थी, लेकिन तब तक प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

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