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Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप के टैरिफ रद्द, भारत समेत दुनिया को राहत

नई दिल्ली, 21 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ पर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे रद्द कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने जिस तरह से एकतरफा टैरिफ लगाए, वह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और इससे वैश्विक व्यापार में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई।

कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए साफ कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।

इमरजेंसी एक्ट के इस्तेमाल पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया। यह कानून राष्ट्रपति को व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में लिखा कि राष्ट्रपति ने “असीमित दायरे और अवधि” वाली शक्तियों का इस्तेमाल किया, जिसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी थी।

ट्रंप के लिए बड़ा झटका

यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनकी ट्रेड पॉलिसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने टैरिफ को दबाव बनाने के सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था। उन्होंने चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत सहित कई देशों पर भारी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे।

भारत पर लगाए गए टैरिफ का क्या हुआ?

अमेरिका ने भारत पर अधिकतम 50% तक टैरिफ लगाया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 25% की पेनाल्टी शामिल थी। हालांकि 3 फरवरी को ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया और रूस से तेल खरीद पर लगाई गई पेनाल्टी वापस ले ली थी। इसके साथ ही भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का भी ऐलान किया गया।

देशपहले लगाया गया टैरिफबाद में संशोधन
भारत50%18%
चीनऊंचा रेसिप्रोकल टैरिफआंशिक राहत
कनाडाऊंचा टैरिफबातचीत के बाद कमी
मैक्सिकोऊंचा टैरिफसमझौते के बाद राहत

ट्रंप की पहली प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने इसे “शर्मनाक” बताया। व्हाइट हाउस में गवर्नरों के साथ नाश्ते के दौरान उन्होंने कहा कि टैरिफ के लिए उनके पास एक “बैकअप प्लान” मौजूद है और वह दूसरे कानूनी रास्तों पर विचार कर सकते हैं।

क्या टैरिफ की रकम लौटेगी?

कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि टैरिफ के जरिए इकट्ठा की गई अरबों डॉलर की रकम का क्या होगा। सवाल उठ रहा है कि क्या भारत समेत उन देशों या एक्सपोर्टर्स को रिफंड मिलेगा, जिन्होंने अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए भारी टैरिफ चुकाया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पर आगे अलग कानूनी प्रक्रिया हो सकती है।

किन टैरिफ पर असर नहीं पड़ेगा

यह फैसला ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 के सेक्शन 232 के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि स्टील, एल्युमीनियम और कुछ ऑटोमोबाइल्स पर लगे टैरिफ फिलहाल बने रहेंगे।

भारत और वैश्विक व्यापार के लिए क्यों अहम है फैसला

भारत के लिए यह फैसला बेहद अहम है, क्योंकि अमेरिका उसके सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक है। 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात किया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों के साथ-साथ भारत को भी बड़ी राहत मिलेगी और ट्रंप की एकतरफा ट्रेड पॉलिसी पर संवैधानिक रोक लगेगी।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप अपने “बैकअप प्लान” के तहत आगे क्या कदम उठाते हैं।

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