नई दिल्ली, 12 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): टमाटर की खेती किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बनती जा रही है। सालभर मांग रहने के कारण यह फसल घरेलू बाजार से लेकर होटल और रेस्टोरेंट तक खपत में रहती है। उद्यान विभाग भी आधुनिक तकनीकों और उन्नत बीज उपलब्ध कराकर किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है।
हालांकि फरवरी के बदलते मौसम ने टमाटर उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में उतार-चढ़ाव, कोहरा और नमी के कारण खेतों में रोगों का प्रकोप तेज हो गया है।
मौसम बदलते ही झुलसा रोग का हमला
फरवरी में टमाटर की फसल में झुलसा रोग (ब्लाइट) का असर अधिक देखने को मिलता है। खेतों में ज्यादा नमी होने पर यह रोग तेजी से फैलता है।
पौधों की पत्तियों और फलों पर छोटे काले या भूरे धब्बे उभरने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां सूख जाती हैं और पौधे कमजोर पड़ जाते हैं। इससे पैदावार घटती है और गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसके कारण बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाता।
झुलसा रोग के प्रमुख कारण
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| अधिक नमी | रोग का तेजी से फैलाव |
| कोहरा व ठंडा मौसम | फफूंद के विकास को बढ़ावा |
| खेत में जलभराव | जड़ों की कमजोरी और संक्रमण |
| संक्रमित अवशेष | रोग का दोबारा प्रसार |
झुलसा रोग से बचाव के उपाय
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खेत में 10 प्रतिशत से अधिक पौधों में लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उपचार शुरू करें। मेटालैक्सिल और मैंकोजेब मिश्रित फफूंदनाशक का छिड़काव 10–15 दिन के अंतराल पर करना चाहिए।
अधिक प्रभावित पौधों और अवशेषों को खेत से हटाकर नष्ट करना जरूरी है। नीम तेल का छिड़काव भी सहायक साबित होता है। खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था और संतुलित उर्वरक प्रयोग से भी रोग का खतरा कम किया जा सकता है।
बैक्टेरियल स्पॉट रोग से भी सावधान
फरवरी में टमाटर की फसल में बैक्टेरियल स्पॉट रोग भी देखा जा रहा है। यह रोग विशेष रूप से गीले और नम मौसम में तेजी से फैलता है।
फलों पर काले धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे वे बेचने योग्य नहीं रहते। यदि समय रहते रोकथाम न की जाए तो उत्पादन और आय दोनों पर असर पड़ सकता है।
बचाव के उपाय
फसल चक्र अपनाना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके अलावा मैंकोजेब का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। खेत में स्वच्छता बनाए रखना और संक्रमित पौधों को हटाना जरूरी है।
कुलमिलाकर, Tomato Cultivation में मुनाफा तभी संभव है जब किसान मौसम और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें। फरवरी में झुलसा और बैक्टेरियल स्पॉट जैसे रोगों का खतरा अधिक रहता है, लेकिन समय पर दवा का छिड़काव, खेत की स्वच्छता और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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