मुंबई, 02 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): घरेलू बाजारों के साथ-साथ अब वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव साफ दिख रहा है। Gold Silver Price में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल मार्केट में सोने का हाजिर भाव करीब 3.3% टूटकर 4703.27 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह 5% फिसलकर 80.28 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
गौरतलब है कि सोना इससे पहले 5594.82 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड हाई और चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस का शिखर स्तर देख चुकी है।
गोल्ड फ्यूचर्स भी दबाव में
अप्रैल डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी कमजोरी से अछूता नहीं रहा। COMEX पर यह 0.3% गिरकर 4729.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। जानकारों के मुताबिक ऊंचे स्तरों से निवेशकों की आक्रामक प्रॉफिट बुकिंग ने गिरावट को और तेज कर दिया।
गिरावट के 4 बड़े कारण
ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी में आई इस जबरदस्त बिकवाली के पीछे कई अहम वजहें हैं।
सबसे बड़ा फैक्टर अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर मजबूत होने से अन्य करेंसी में सोना-चांदी महंगी हो जाती है, जिससे उनकी डिमांड कमजोर पड़ती है।
दूसरा अहम कारण है तेज प्रॉफिट बुकिंग। रिकॉर्ड हाई के आसपास पहुंचने के बाद बड़े निवेशकों और फंड्स ने मुनाफा निकालना शुरू किया।
तीसरी बड़ी वजह CME ग्रुप द्वारा मार्जिन रिक्वायरमेंट बढ़ाना है। इससे ट्रेडर्स पर अतिरिक्त कैपिटल का दबाव बढ़ गया और कई स्पेक्युलेटिव पोजीशन कट होने लगीं।
चौथा फैक्टर फेडरल रिजर्व से जुड़ी अनिश्चितता है। बाजार इस बात का आकलन कर रहे हैं कि नए फेड चेयरमैन के रूप में नामित केविन वॉर्श ब्याज दरों को लेकर कितना सख्त रुख अपनाते हैं।
CME ग्रुप ने क्यों बढ़ाया मार्जिन?
CME ग्रुप ने मेटल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन बढ़ाने का ऐलान किया है, जो सोमवार को मार्केट बंद होने के बाद लागू होंगे।
- COMEX गोल्ड फ्यूचर्स (1oz) का मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8%
- COMEX 5000 सिल्वर फ्यूचर्स (SI) का मार्जिन 11% से बढ़ाकर 15%
इसके अलावा प्लैटिनम और पैलेडियम फ्यूचर्स पर भी मार्जिन बढ़ाया गया है। आमतौर पर मार्जिन बढ़ने से लिक्विडिटी घटती है और ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ती है, जिससे कीमतों पर दबाव आता है।
फेड रेट कट को लेकर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?
Reuters के मुताबिक, KCM के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वाटरर का कहना है कि केविन वॉर्श का रुख आम तौर पर डॉलर के लिए सपोर्टिव और सोने के लिए नेगेटिव माना जाता है। उनका फोकस महंगाई पर रहता है और वे क्वांटिटेटिव ईजिंग तथा फेड की बड़ी बैलेंस शीट के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि इसके बावजूद निवेशकों को अभी भी उम्मीद है कि 2026 में फेडरल रिजर्व कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
चांदी में क्यों आई ज्यादा गिरावट?
सोने के मुकाबले चांदी में गिरावट ज्यादा रही। ग्लोबल मार्केट में चांदी का हाजिर भाव 5% टूटकर 80.28 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार डॉलर की मजबूती और प्रॉफिट बुकिंग के अलावा कई टेक्निकल फैक्टर्स ने भी चांदी की कीमतों को नीचे खींचा है।
====
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45