मुंबई, 22 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): पाम ऑयल में मजबूती का रुख – अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है। मलेशिया में पाम ऑयल के भाव 4,150 रिंग्गित प्रति टन के पार निकल गए हैं। उत्पादन में गिरावट की आशंका और भारत व चीन से बढ़ती मांग ने कीमतों को अहम सपोर्ट दिया है।
बाजार सूत्रों के अनुसार, जनवरी में पाम ऑयल उत्पादन में 15–17% तक गिरावट की संभावना जताई जा रही है। कम सप्लाई के इस माहौल में आयातक देशों की सक्रिय खरीदारी ने कीमतों को ऊपर बनाए रखा है।
भारत और चीन की मांग से मिला सहारा
वैश्विक स्तर पर भारत और चीन की ओर से खाद्य तेलों की मजबूत मांग पाम ऑयल के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। दोनों देशों में खाद्य तेल की खपत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल को अतिरिक्त सपोर्ट मिला।

इसके साथ ही, सोयाबीन और सोया ऑयल की कीमतों में तेजी का असर भी पाम ऑयल पर पड़ा है। अमेरिका की बायोफ्यूल नीति से सोयाबीन बाजार में मजबूती आई है, जबकि चीन की मजबूत खरीद से भी कीमतों को सहारा मिला है। हाल ही में अमेरिका ने एक ही दिन में 7.06 लाख टन सोयाबीन का निर्यात किया, जिससे ऑयलसीड्स मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट बना।
पाम ऑयल की कीमतों की चाल
| अवधि | कीमतों में बदलाव |
|---|---|
| 1 दिन | +1% |
| 1 हफ्ता | +3% |
| 1 महीना | +4% |
| जनवरी से अब तक | +3% |
बजट से उम्मीदें: कस्टम ड्यूटी पर फोकस
घरेलू मोर्चे पर एडिबल ऑयल इंडस्ट्री ने आगामी बजट में खाने के तेल की कस्टम ड्यूटी में बदलाव न करने की मांग की है। इंडस्ट्री का कहना है कि मौजूदा ड्यूटी स्ट्रक्चर को बरकरार रखा जाए ताकि कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव न हो। साथ ही, सरकार से तिलहन बीजों के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देने की भी अपील की गई है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक उत्पादन में गिरावट, भारत–चीन की मांग और सोयाबीन बाजार की मजबूती बनी रहती है, तब तक पाम ऑयल की कीमतों में मजबूती का रुख जारी रह सकता है। हालांकि, मौसम, नीति से जुड़े फैसले और कच्चे तेल की चाल आगे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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