मुंबई, 15 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): चीन की जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स द्वारा जारी वार्षिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, 2025 में चीन को भारत के निर्यात में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। लंबे समय से जारी गिरावट के रुझान को तोड़ते हुए भारतीय निर्यात में 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि इसके बावजूद भारत-चीन व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 116.12 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
रिकॉर्ड स्तर पर द्विपक्षीय व्यापार
डेटा के अनुसार, 2025 में भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर अब तक के सर्वोच्च स्तर 155.62 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। यह वही वर्ष रहा जब दोनों देशों को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ का भी सामना करना पड़ा।
जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच चीन को भारत का कुल निर्यात बढ़कर 19.75 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो साल-दर-साल आधार पर 9.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसके उलट, चीन से भारत का आयात कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ा और 12.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 135.87 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
व्यापार घाटा फिर 100 अरब डॉलर के पार
भारत-चीन व्यापार में लगातार चिंता का विषय बना रहने वाला व्यापार घाटा 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 2023 के बाद दूसरी बार है जब व्यापार घाटा 100 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर गया है। 2024 में यह घाटा 99.21 अरब अमेरिकी डॉलर था, जब चीन का भारत को निर्यात 113.45 अरब अमेरिकी डॉलर और भारत का चीन को निर्यात 14.25 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था।
| वर्ष | भारत का चीन को निर्यात (अरब USD) | चीन का भारत को निर्यात (अरब USD) | व्यापार घाटा (अरब USD) |
|---|---|---|---|
| 2024 | 14.25 | 113.45 | 99.21 |
| 2025 | 19.75 | 135.87 | 116.12 |
निर्यात बढ़ोतरी को माना गया सकारात्मक संकेत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय निर्यात में 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि भले ही कुल व्यापार के मुकाबले सीमित हो, लेकिन यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि तेल बीज, समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसाले जैसे भारतीय उत्पाद धीरे-धीरे कठिन माने जाने वाले चीनी बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब चीन अपनी घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
भारत बीते कुछ वर्षों से चीन से अपने आईटी, फार्मा और कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग करता रहा है, जो भारत के मजबूत निर्यात क्षेत्र माने जाते हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच चीन का मजबूत व्यापार
कस्टम्स डेटा के मुताबिक, 2025 में चीन का कुल व्यापार सरप्लस बढ़कर रिकॉर्ड 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान चीन का कुल निर्यात 3.77 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 2.58 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
चीनी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के टैरिफ बढ़ाने के बावजूद निर्यात में मजबूती का श्रेय बीजिंग की डाइवर्सिफिकेशन रणनीति, सहायक नीतियों और देश की गहरी औद्योगिक क्षमता को दिया है। जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स के वाइस-मिनिस्टर वांग जून ने कहा कि चीन के ट्रेडिंग पार्टनर लगातार विविध हो रहे हैं, जिससे जोखिम सहनशीलता मजबूत हुई है।
हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगे की राह आसान नहीं होगी। फ्रेंच निवेश बैंक नेटिक्सिस के सीनियर एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिस्ट गैरी एनजी के अनुसार, व्यापार तनाव बने रहने की संभावना है और 2026 में बाहरी मांग 2025 जितनी मजबूत नहीं रह सकती, हालांकि चीनी निर्यात में वृद्धि धीमी गति से जारी रह सकती है।
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