लखनऊ, 05 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश सरकार ने भूमि से जुड़े कामकाज को आसान, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब भू-स्वामित्व नामांतरण (Mutation) और लैंड यूज चेंज (भूमि उपयोग परिवर्तन) की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों, किसानों और निवेशकों को लंबी कागजी कार्रवाई और दफ्तरों के चक्कर से राहत देना है।
सरकार की यह प्रणाली राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र (NIC) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के जरिए लागू की जा रही है, जिसे फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत धारा-34 के अंतर्गत नामांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। अब आवेदक को खसरा-खतौनी विवरण, मालिकाना हक के प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेज एक ही बार में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। डिजिटल डेटा फ्लो के जरिए रिकॉर्ड की जांच होगी, जिससे लेखपाल की आख्या और लंबी प्रतीक्षा प्रक्रिया काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
इसी तरह धारा-80 के अंतर्गत कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने की प्रक्रिया भी डिजिटल की जा रही है। अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और सरल प्रमाणपत्र प्रणाली लागू होगी। इससे बार-बार तहसील और अन्य कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या खत्म होगी।
नई प्रणाली में सभी नोटिस अब डाक के बजाय ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएंगे। नामांतरण प्रमाणपत्र और लैंड यूज चेंज सर्टिफिकेट भी कुछ ही दिनों में ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल पहल से भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, यूपी सरकार की यह डिजिटल भूमि सुधार पहल राज्य को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल गवर्नेंस के मामले में नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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