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रबी सीजन में चना की नई फसल से बाजार पर दबाव, MSP से नीचे फिसले दाम

नई दिल्ली, 17 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): रबी सीजन में चना की नई फसल की आवक तेज होते ही बाजार में दबाव साफ नजर आने लगा है. कमजोर मांग और सरकारी खरीद की शुरुआत न होने से चना के दाम लगातार नरम पड़ते दिख रहे हैं. कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे कारोबार कर रहा है.

व्यापारियों के मुताबिक इस साल चना का रकबा बढ़ा है और मौसम भी अनुकूल रहा, जिससे उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है. यही वजह है कि बाजार में सप्लाई बढ़ने की धारणा पहले से ही कीमतों पर असर डाल रही है.

15 दिन में 10–15% तक गिरावट

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के सचिव सतीश उपाध्याय ने बताया कि बीते 15 दिनों में चना के दाम करीब 10 से 15 प्रतिशत तक गिर चुके हैं. उन्होंने कहा कि मंडियों में आवक लगातार बढ़ रही है, जबकि दाल मिलों की खरीद सुस्त बनी हुई है.

फिलहाल मंडियों में चना 54–55 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा है. आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से बड़ी मात्रा में फसल आने की संभावना है, जिससे कीमतों पर और दबाव बन सकता है.

आयातित चना बना देसी फसल की चुनौती

चना दाल की कमजोर मांग की एक बड़ी वजह आयातित चना को माना जा रहा है. व्यापार सूत्रों के मुताबिक बंदरगाहों पर उपलब्ध आयातित चना देसी चना की तुलना में सस्ता है और दाल रिकवरी के साथ रंग व आकार के लिहाज से भी बेहतर बताया जा रहा है.

तंजानिया और ऑस्ट्रेलिया से आया चना 5,300 से 5,425 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में उपलब्ध है. इसी कारण दाल मिलर्स मंडियों से देसी चना की खरीद करने में हिचकिचा रहे हैं.

MSP और बाजार कीमतों की स्थिति

विवरणकीमत (रुपये/क्विंटल)
मौजूदा मंडी भाव5,400 – 5,500
आयातित चना5,300 – 5,425
चना MSP (2026–27)5,875

सरकारी खरीद से ही मिल सकता है सहारा

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार फरवरी की शुरुआत से चना के औसत थोक दामों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. सरकार ने 2026–27 रबी मार्केटिंग सीजन के लिए चना का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है.

हालांकि कर्नाटक में MSP पर सीमित मात्रा में खरीद को मंजूरी दी गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक बड़े स्तर पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होती, तब तक चना के दामों को ठोस सहारा मिलना मुश्किल है.

बढ़े रकबे से उत्पादन ज्यादा रहने के संकेत

इस साल चना की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है. मौसम अनुकूल रहने से फसल की हालत भी अच्छी बताई जा रही है. ऐसे में बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि कुल उत्पादन पिछले साल से ज्यादा रह सकता है.

फिलहाल स्थिति यह है कि मंडियों में आवक भारी है, मांग कमजोर बनी हुई है और आयात का दबाव भी कायम है. इन सभी कारणों से चना के दाम निकट भविष्य में दबाव में बने रह सकते हैं.

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