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मुंबई बनेगी वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार, वैश्विक आर्थिक स्थिरता में निभाएगी अहम भूमिका: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई, 17 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्वीकरण के बदलते स्वरूप के बीच “विश्वसनीय वैश्वीकरण” की अवधारणा तेजी से केंद्र में आ रही है। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आने वाले वर्षों में मुंबई वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार बनेगी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता में निर्णायक योगदान देगी।

विदेश मंत्रालय, फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल और महाराष्ट्र शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026’ सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री फडणवीस और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, राजनयिक और वैश्विक निवेशक बड़ी संख्या में मौजूद थे।

महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र देश की आर्थिक रीढ़ के रूप में स्थापित हो चुका है। राज्य का योगदान न केवल राष्ट्रीय उत्पादन में बल्कि वैश्विक व्यापार और निवेश प्रवाह में भी अहम है।

आर्थिक संकेतकमहाराष्ट्र की भागीदारी
भारत के जीडीपी में योगदान14–15%
औद्योगिक उत्पादनलगभग 20%
प्रत्यक्ष विदेशी निवेशदेश में अग्रणी
पश्चिमी बंदरगाहों से कंटेनर यातायात60% से अधिक

उन्होंने कहा कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भरोसेमंद साझेदारियां ही दीर्घकालिक आर्थिक सफलता सुनिश्चित करेंगी।

प्रधानमंत्री के कहा-भारत स्थिरता की मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक आर्थिक संवाद को नई दिशा देने वाला मंच है। तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत स्थिर नेतृत्व, मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई के संतुलन के साथ दुनिया के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पारदर्शी शासन और गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत आज ग्लोबल साउथ की एक सशक्त और विश्वसनीय आवाज है।

मुंबई: भविष्य की वैश्विक आर्थिक धुरी

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आर्थिक संप्रभुता का अर्थ केवल आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि विविधीकृत व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी क्षमता का संतुलन है। मुंबई पारदर्शिता, सुदृढ़ विनियमन और समावेशी विकास के मानकों में अग्रणी भूमिका निभाएगी।

उन्होंने बताया कि राज्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा गवर्नेंस और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एआई पार्क, डेटा सेंटर क्लस्टर और कौशल विश्वविद्यालय स्थापित कर रहा है। साथ ही हरित हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा तथा सतत शहरी अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश किए जा रहे हैं।

वैश्विक अनिश्चितता में भारत एक भरोसेमंद साझेदार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल अस्थिरता और अनिश्चितताओं से भरा है। ऐसे में ‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण समय की मांग है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य उद्योग, कृषि, सेवा, प्रौद्योगिकी और नवाचार में समानांतर प्रगति से ही संभव है।

जयशंकर ने 5जी तकनीक, चंद्रयान मिशन, वंदे भारत ट्रेन और यूपीआई जैसे उदाहरणों के जरिए कहा कि भारत आज न केवल तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक सक्षम और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर चुका है।

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