नई दिल्ली, 09 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कल रविवार को बेंगलुरु प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भाग लेने के साथ-साथ भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु का दौरा किया। मंत्री ने संस्थान में विकसित की जा रही उन्नत फल एवं फूलों की किस्मों का अवलोकन किया और वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे इनोवेशन की सराहना करते हुए इन्हें भारतीय बागवानी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
‘अर्का उदय’ आम की किस्म ने खींचा ध्यान
दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने IIHR द्वारा विकसित ‘अर्का उदय’ आम की किस्म को देखा, जिसमें मात्र चार वर्ष की आयु में ही उल्लेखनीय फ्लावरिंग देखने को मिली है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस किस्म में प्रति पेड़ लगभग 25 किलोग्राम तक उत्पादन क्षमता पाई गई है। मंत्री ने कहा कि ‘अर्का उदय’ अपने मीठे स्वाद, अधिक उपज और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की विशेषताओं के कारण किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है और यह बागवानी क्षेत्र में अनुसंधान की सफलता का स्पष्ट उदाहरण है।
गुलाब की अर्का परिमल वैरायटी अद्भुत है। आमतौर पर आज के गुलाब देखने में सुंदर होते हैं, लेकिन उनमें सुगंध नहीं होती।
यह वैरायटी अलग है, इसमें गुलाब की भीनी और स्वाभाविक खुशबू है।देसी गुलाब की परंपरा को सँजोते हुए, सुगंधयुक्त अर्का परिमल विकसित करने के लिए सभी वैज्ञानिकों को… pic.twitter.com/5g7Pu4w9yI
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) February 8, 2026
ड्रैगन फ्रूट में तकनीकी नवाचार
IIHR में ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर किए जा रहे प्रयोगों की जानकारी भी कृषि मंत्री को दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार रात में कुछ घंटों तक कृत्रिम रोशनी का उपयोग कर फ्लावरिंग कराई जा रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव हो पाती है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस तरह के तकनीकी नवाचार देश की फल आयात पर निर्भरता कम करेंगे और किसानों को अधिक लाभकारी विकल्प उपलब्ध कराएंगे।
सुगंधयुक्त गुलाब ‘अर्का परिमल’ की विशेष सराहना
कृषि मंत्री ने गुलाब की खास किस्म ‘अर्का परिमल’ की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अधिकांश गुलाब दिखने में आकर्षक तो होते हैं, लेकिन उनमें पारंपरिक प्राकृतिक सुगंध नहीं होती। ‘अर्का परिमल’ इस दृष्टि से अलग है, क्योंकि इसमें देसी गुलाब की भीनी और स्वाभाविक खुशबू मौजूद है। उन्होंने देसी गुलाब की परंपरा को सहेजते हुए इस किस्म को विकसित करने के लिए IIHR के वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा कि ऐसे नवाचार भारतीय बागवानी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकते हैं।
पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
प्रतिदिन पौधरोपण के संकल्प के तहत कृषि मंत्री ने IIHR परिसर में संस्थान के वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ आम का पौधा रोपित किया। उन्होंने कहा कि ICAR-IIHR जैसे संस्थान बागवानी अनुसंधान के साथ-साथ हरित नवाचार और सतत कृषि को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे परिसरों में पौधरोपण पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सोच दोनों को प्रोत्साहित करता है।
IIHR बेंगलुरु का यह दौरा इस बात का प्रमाण है कि सरकार बागवानी अनुसंधान और नवाचार को कृषि विकास की प्राथमिकताओं में रख रही है। ‘अर्का परिमल’ गुलाब, ‘अर्का उदय’ आम और ड्रैगन फ्रूट जैसी उन्नत तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत को फल और फूलों के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।
====
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45