किसानों के दिल्ली मार्च को लेकर होम मिनिस्ट्री अलर्ट, शंभू बार्ड पर 12 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली, 14 हजार लोगों की भीड़

किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में धरना प्रदर्शन करना चाहते हैं। वहीं फसलों पर एमएसपी गारंटी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी किसान संगठनों द्वारा केंद्र के साथ चार दौर की बातचीत बेनतीजा रही। जब सरकार से कोई बात नहीं हुई तो अब किसान संगठनों ने अपना आंदोलन तेज करते हुए दिल्ली तक मार्च की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों के दिल्ली चलो मार्च पर गृह मंत्रालय की आंतरिक रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। माना जा रहा है कि किसान दिल्ली में धरना प्रदर्शन के दौरान उग्र हो सकते हैं।

रिपोर्ट में पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई और बताया गया कि शंभू सीमा पर लगभग 14000 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है और धाबी-गुजरान बैरियर पर एक विशाल सभा की अनुमति दी गई है, जिसमें लगभग 4500 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए पंजाब-हरियाणा और हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही हरियाणा के सात जिलों में इंटरनेट पर लगी पाबंदी एक बार फिर बढ़ा दी गई है।

गृह मंत्रालय ने जताई चिंता

किसान संगठनों द्वारा दिल्ली मार्च करने की घोषणा के बाद गृह मंत्रालय ने पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और मुख्य सचिव को सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

होम मिनिस्ट्री की आंतरिक रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

गृह मंत्रालय की आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, राजपुरा-अंबाला रोड पर शंभू बैरियर पर लगभग 14000 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है, साथ ही लगभग 1200 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 300 कार, 10 मिनी बसें और अन्य छोटे वाहनों को भी इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है। इसी तरह, राज्य ने धाबी-गुजरान बैरियर पर लगभग 500 ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ लगभग 4500 व्यक्तियों की विशाल सभा की अनुमति दी है।

पंजाब-हरियाणा शंभू सीमा पर किसानों का प्रदर्शन

आंतरिक रिपोर्टों के बाद, गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कहा- पिछले कुछ दिनों से राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है, क्योंकि ऐसा लगता है कि विरोध की आड़ में, उपद्रवियों/कानून तोड़ने वालों को पत्थर फेंकने, भीड़ जुटाने के लिए खुली छूट दी गई है। पड़ोसी राज्यों में अशांति और अव्यवस्था पैदा करने के स्पष्ट इरादे से सीमा पर भारी मशीनरी लामबंद करने के विरोध में कानून तोड़ने के लिए शरारती तत्वों को गिरफ्तार किया गया है। इसे खुली छूट दी गई है। हरियाणा पुलिस द्वारा चिंता जताए जाने के बाद गृह मंत्रालय का यह पत्र आया है।

किसान भारी मशीनों के साथ बार्डर पर पहुंचे

बताया जा रहा है कि शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा बनाई गई दीवारों को तोड़ने के लिए प्रदर्शनकारी पोकलेन जैसी भारी मशीनों के साथ पहुंचे हैं। किसान संगठन इन मशीनों की मदद से दीवार तोड़कर दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे। इस संबंध में हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर किसानों की पोकलेन जैसी भारी मशीनों को जब्त करने का अनुरोध किया है। हरियाणा पुलिस के इस पत्र के आधार पर गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को सुरक्षा व्यवस्था में खलल डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सीमा पर पंजाब पुलिस ने भारी मशीनों पर लगाया बैन

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर का पत्र मिलने पर पंजाब पुलिस ने पोकलेन और जेसीबी मशीनों सहित भारी मशीनरी की हरियाणा की ओर आवाजाही रोकने के निर्देश दिए। डीजीपी पंजाब ने सभी रेंज एडीजीपी/आईजीपीएस/डीआईजी, सभी पुलिस कमिश्नरों और सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भेजे एक पत्र में निर्देश दिए हैं और कहा है कि जेसीबी, पोकलेन, टिपर, हाइड्रा और अन्य शक्तिशाली अर्थमूविंग जैसी भारी मशीनरी को पंजाब-हरियाणा सीमा खनौरी और शंभू तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। क्योंकि इनपुट मिले हैं कि प्रदर्शनकारी हरियाणा पुलिस के बैरिकेड तोड़कर हरियाणा में घुसने की योजना बना रहे हैं। दोनों राज्यों में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। वहीं, पंजाब पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर 700 दंगा पुलिस कर्मियों को तैनात किया है।

हाईकार्ट ने किसानों के ट्रैक्टर ट्राली के इस्तेमाल पर लगाई रोक

उधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों को बस आदि से दिल्ली जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली को राजमार्गों पर नहीं चलाया जा सकता है, इसलिए किसान बस या सार्वजनिक परिवहन से राजधानी जा सकते हैं।

दिल्ली पुलिस ने किया मॉक ड्रिल

दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकने की तैयारी कर रही है। पुलिस उपायुक्त (बाहरी) जिमी चिराम ने कहा कि दिल्ली-हरियाणा सीमा पर अर्धसैनिक बलों के अलावा पर्याप्त संख्या में बल तैनात किया गया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि दिल्ली पुलिस किसानों को शहर की सीमाओं पर रोकने के लिए तैयार है। सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे एक भी प्रदर्शनकारी या वाहन को राजधानी में प्रवेश न करने दें। इसको लेकर पुलिस मॉक ड्रिल कर रही है।

चौथे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही

दरअसल रविवार आधी रात तक चली किसान संगठनों और सरकार के बीच पिछले दौर की वार्ता भी नाकाम रही। इस बैठक में मंत्रियों के एक पैनल ने पांच साल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पांच फसलों – मूंग दाल, उड़द दाल, अरहर दाल, मक्का और कपास – को खरीदने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन किसानों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि यह प्रस्ताव किसानों के हित में नहीं है।

कृषि मंत्री ने किसानों से की अपील

दिल्ली में किसानों के मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा, “हमें पता चला है कि किसान नेताओं ने एमएसपी पर सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। हम किसानों के लिए अच्छा काम करना चाहते हैं और ऐसा करने के लिए कई राय दी जा सकती हैं, क्योंकि हमने हमेशा अच्छी राय का स्वागत किया है। लेकिन यह राय किसानों के लिए कैसे फायदेमंद होगी? इसे करने का तरीका खोजने के लिए संवाद ही एकमात्र रास्ता है। किसानों की मांगों का समाधान बातचीत से जरूर निकलेगा।

जानिए क्या हैं किसानों की मांगें

किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी पर कानूनी गारंटी की है। किसानों का कहना है कि सरकार को एमएसपी पर कानून लाना चाहिए। किसान एमएसपी पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों का दावा है कि सरकार ने उनसे एमएसपी की गारंटी पर कानून लाने का वादा किया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका। स्वामीनाथन आयोग ने किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना देने की सिफारिश की थी। आयोग की रिपोर्ट आए 18 साल बीत चुके हैं, लेकिन एमएसपी पर की गई सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा किसान पेंशन, कर्जमाफी, बिजली दरें न बढ़ाएं, साथ ही किसान संगठन लखीमपुर खीरी हिंसा के शिकार हुए किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं।

 

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