Economic Survey 2025-26: खेती से 46% लोगों को रोजगार, राष्ट्रीय आय में 20% योगदान

नई दिल्ली, 30 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि खेती भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। भले ही कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों का राष्ट्रीय आय (GVA) में योगदान लगभग 20 प्रतिशत हो, लेकिन देश की 46 प्रतिशत आबादी की रोजी-रोटी इसी सेक्टर पर निर्भर है। यही कारण है कि सरकार खेती को समावेशी विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार मान रही है।

सर्वे के मुताबिक, किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार उत्पादकता सुधार, आधुनिक तकनीक, बेहतर इनपुट सपोर्ट, बाजार तक आसान पहुंच और फसल बीमा जैसे उपायों को मिशन मोड में लागू कर रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत चावल, गेहूं, दालों, मोटे अनाज और पोषक अनाज (श्री अन्न) की पैदावार बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है।

दलहन–तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि तिलहन और खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय मिशनों के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। पिछले एक दशक में तिलहन का रकबा, उत्पादन और उत्पादकता—तीनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 कृषि-प्रधान जिलों को चिन्हित किया है। इस योजना का फोकस फसल विविधीकरण, सिंचाई सुधार, भंडारण सुविधाएं और टिकाऊ खेती पर है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच बताया गया है। 2024-25 में 4.19 करोड़ किसानों को इस योजना के तहत बीमा कवर मिला, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार से होने वाले नुकसान में बड़ी राहत मिली।

खेती मजबूत तो अर्थव्यवस्था मजबूत

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, पिछले पांच सालों में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही है। 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई। 2016 से 2025 के बीच खेती की औसत वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो अब तक के दशकों में सबसे बेहतर मानी जा रही है।

पशुपालन और मछली पालन आय का बड़ा सहारा

खेती की इस मजबूती के पीछे पशुपालन और मछली पालन की बड़ी भूमिका रही है।

  • पशुधन क्षेत्र (दूध, पशु, पोल्ट्री) में औसतन 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • मछली पालन में यह वृद्धि और भी ज्यादा, करीब 8.8 प्रतिशत रही।

2015 से 2024 के बीच पशुपालन क्षेत्र की GVA लगभग तीन गुना हो चुकी है। वहीं, 2014 के बाद से मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

खाद्यान्न और बागवानी में रिकॉर्ड

आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 3,577 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इस बढ़ोतरी में धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाज (श्री अन्न) की अहम भूमिका रही।

बागवानी खेती ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन करीब 362 मिलियन टन रहा, जो खाद्यान्न उत्पादन से भी ज्यादा है।
फल और सब्जियों से किसानों को बेहतर दाम मिलने के कारण यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।

वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत पहचान

आर्थिक सर्वे बताता है कि भारत अब वैश्विक कृषि बाजार में मजबूत खिलाड़ी बन चुका है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक है। फल, सब्जी और आलू के उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यह संकेत है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

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