मुंबई, 05 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): कच्चे तेल की कीमतों में पिछले दो दिनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार को 1.2% की मजबूती के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) तेल $60 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, जबकि ब्रेंट क्रूड $63 प्रति बैरल से ऊपर सेटल हुआ। वर्षभर के उतार-चढ़ाव के बीच यह बढ़त बाजार में नई उम्मीदें जगाती है, खासकर जब भू-राजनीतिक मोर्चे पर हलचलें बढ़ी हैं।
यूक्रेन-रूस वार्ता से बढ़ी बाजार की उम्मीदें
तेल बाजार की सबसे बड़ी निगाहें फिलहाल यूक्रेन में चल रही सीज़फ़ायर बातचीत पर टिकी हुई हैं। यूक्रेनी प्रतिनिधि फ्लोरिडा में होने वाले नए दौर की वार्ताओं में शामिल होने वाले हैं। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया कि अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव के कुछ हिस्से उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं।
बाजार को उम्मीद है कि यदि किसी भी स्तर पर प्रगति होती है और रूस पर लगे तेल निर्यात प्रतिबंधों (Export Ban) में नरमी आती है, तो वैश्विक बाजार में फिर से बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल आ सकता है। इस संभावना ने ट्रेडर्स को सतर्क भी किया है, क्योंकि बढ़ती सप्लाई कीमतों को नीचे धकेल सकती है।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि डील तक पहुंचना अभी भी काफी दूर की बात लगती है। फिलहाल बाजार संभावित परिणामों पर प्रतिक्रिया दे रहा है, न कि किसी औपचारिक घोषणा पर।
बढ़ता ग्लोबल सरप्लस और कीमतों पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतें एक ओर जहां भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ती वैश्विक सप्लाई बाजार पर दबाव डाल रही है। सऊदी अरामको ने जनवरी के लिए अपने प्रमुख Arab Light Crude की कीमतों को 2021 के बाद के सबसे निचले स्तर पर लाने की घोषणा की है। यह वैश्विक मांग में सुस्ती और सरप्लस की स्थिति का स्पष्ट संकेत है।
कनाडाई क्रूड भी कमजोरी दिखा रहा है, जिससे साफ़ है कि कई बड़े उत्पादक इस समय प्राइस कट के जरिए बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। सप्लाई बढ़ने से साल भर में पहले ही भारी नुकसान झेल रहे तेल बाजार पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अधिक सप्लाई का मतलब है कि आने वाले महीनों में कीमतें स्थिर रहना मुश्किल हो सकता है, खासकर यदि रूस के लिए निर्यात चैनल खुलते हैं।
बाजार की मौजूदा स्थिति: अनिश्चितता, अवसर और जोखिम
कच्चा तेल वर्तमान में ऐसी स्थिति में है जहां विभिन्न कारक कीमतों को अलग दिशाओं में धकेल रहे हैं।
- यूक्रेन वार्ता से शांति की उम्मीदें बन रहीं हैं,
- रूस पर प्रतिबंधों में संभावित ढील बाजार को अतिरिक्त सप्लाई की ओर खींच रही है,
- ग्लोबल सरप्लस बढ़ने से दामों पर डाउनसाइड जोखिम है,
- और सऊदी व कनाडाई क्रूड की कीमतों में कटौती बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही है।
इस बहु-स्तरीय स्थिति ने तेल बाजार को अस्थिर लेकिन अत्यधिक सक्रिय बना दिया है।
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