चीन ने कॉटन पर आयात शुल्क घटाया, वैश्विक कपास बाजार में हलचल

Cotton Import Duty

नई दिल्ली, 3 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): चीन ने अपने घरेलू टेक्सटाइल और स्पिनिंग उद्योग को सपोर्ट देने के लिए कॉटन के आयात पर शुल्क में कटौती की है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब चीनी कपड़ा उद्योग कमजोर वैश्विक मांग, ऊंची उत्पादन लागत और सीमित मार्जिन के दबाव से जूझ रहा है।

उद्योग सूत्रों के अनुसार शुल्क में कटौती से आयातित कपास सस्ती होगी, जिससे चीनी स्पिनिंग मिलों को कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर मिलेगी। इससे उत्पादन लागत घटने और तैयार कपड़ा व यार्न के निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है।

चीन दुनिया का सबसे बड़ा कपास उपभोक्ता और प्रमुख आयातक है। इसलिए उसकी आयात नीति में किसी भी तरह का बदलाव अंतरराष्ट्रीय कॉटन बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। मौजूदा कदम को बाजार में मांग को सक्रिय करने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत पर संभावित असर

चीन की आयात नीति में नरमी भारत के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। भारत विश्व के बड़े कपास उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। यदि चीनी मिलों की आयात खरीद बढ़ती है, तो भारतीय कपास के निर्यात सौदे तेज हो सकते हैं।

निर्यात मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कॉटन की उपलब्धता कुछ हद तक सख्त हो सकती है। इसका सीधा असर एमएसपी के आसपास या उससे ऊपर भाव टिकने के रूप में दिख सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में घरेलू टेक्सटाइल मांग और सरकारी नीति भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम रहेंगी।

वैश्विक कॉटन प्राइस आउटलुक

वैश्विक स्तर पर चीन की यह पहल कॉटन कीमतों के लिए सपोर्टिव फैक्टर मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शॉर्ट टर्म में कीमतों को सहारा मिल सकता है। वहीं अमेरिका, ब्राजील और भारत जैसे निर्यातक देशों से खरीद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और टेक्सटाइल मांग कमजोर रहने पर तेज तेजी सीमित रह सकती है

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में वैश्विक कॉटन कीमतें स्थिर से हल्की मजबूत रेंज में रह सकती हैं। चीन की नीति का असर भारतीय मंडियों पर धीरे-धीरे दिख सकता है।

प्रमुख मंडियों में कपास के औसत भाव (₹/क्विंटल):

  • राजकोट: ₹6,200 – ₹6,400
  • अकोला: ₹6,100 – ₹6,300
  • नागपुर: ₹6,050 – ₹6,250
  • गुंटूर: ₹6,300 – ₹6,500

व्यापारियों के अनुसार फिलहाल मंडियों में मांग सामान्य है, लेकिन निर्यात संकेत मजबूत होने पर भावों में धीरे-धीरे सुधार संभव है। कुल मिलाकर, चीन द्वारा कॉटन पर आयात शुल्क घटाने का फैसला उसके घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के साथ-साथ ग्लोबल और भारतीय कपास बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में निर्यात सौदों और अंतरराष्ट्रीय कीमतों की दिशा इस फैसले के वास्तविक असर को स्पष्ट करेगी।

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