रायपुर, 12 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों और चावल निर्यातकों के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चावल निर्यातकों के लिए मंडी शुल्क (मंडी फीस) में दी जा रही छूट को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य राज्य से चावल निर्यात को प्रोत्साहित करना और वैश्विक बाजार में छत्तीसगढ़ की स्थिति को और मजबूत करना है।
शनिवार (10 जनवरी) को एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (दूसरा संस्करण) को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी फीस में छूट का विस्तार निर्यातकों के साथ-साथ किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में छत्तीसगढ़ को मिलेगी पहचान
CM साय ने कहा कि यह समिट इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें 12 देशों के अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 6 देशों के दूतावासों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह भागीदारी छत्तीसगढ़ के चावल क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों के जरिए राज्य को अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी।
‘भारत का चावल का कटोरा’ है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को यूं ही “भारत का चावल का कटोरा” नहीं कहा जाता। यह पहचान आज भी कायम है और चावल राज्य की खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने सरगुजा क्षेत्र की प्रसिद्ध सुगंधित किस्मों जीराफूल और दुबराज चावल का विशेष उल्लेख किया, जो अपनी खुशबू और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में पहचान बना चुके हैं।
मंडी फीस छूट से निर्यात को मिलेगी रफ्तार
CM साय ने बताया कि मंडी फीस में छूट की मांग निर्यातक लंबे समय से कर रहे थे। यह छूट पिछले साल दी गई थी, जिसकी अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त होनी थी। अब इसके एक साल के विस्तार से राज्य से चावल निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देती है, जिससे चावल प्रोसेसिंग और निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
किसानों को धान के मिल रहे 3100 रुपये प्रति क्विंटल
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ करीब 90 देशों को एक लाख टन चावल का निर्यात करता है। उन्होंने निर्यातकों को सरकार के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि किसानों को धान के लिए ₹3,100 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है, जिसमें प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीद की सीमा तय है। पिछले वर्ष राज्य में लगभग 149 लाख टन धान की खरीद की गई थी और इस साल इसमें और वृद्धि की संभावना है।
APEDA के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन भी किया। समिट के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में चावल की विभिन्न किस्मों, क्षेत्रीय विशेषताओं, खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, APEDA चेयरमैन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिलाल, वरिष्ठ अधिकारी, राइस मिलर्स, व्यापारी और देशभर से आए अन्य स्टेकहोल्डर्स मौजूद रहे।
यह फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ सरकार किसान, उद्योग और निर्यात—तीनों को साथ लेकर कृषि आधारित विकास को नई दिशा देने की रणनीति पर काम कर रही है।
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