चांदी 2026 के जनवरी हाई से करीब 48% नीचे आ चुकी है, लेकिन लंबी अवधि में इसने सोने समेत प्रमुख एसेट क्लास को पीछे छोड़ा है। इंडस्ट्रियल डिमांड, लगातार सप्लाई डेफिसिट और चीन की भूमिका चांदी के आउटलुक को मजबूत बना रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बाद रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अब तेज गिरावट आई है। भारत के लिए सस्ते आयात से सरकार और किसानों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि कीमतें अभी भी पिछले साल से काफी ऊपर हैं।
चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक को लेकर चिंता के बीच NFCSF ने सरकार से मिलों के फिजिकल स्टॉक वेरिफिकेशन के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। उद्योग को आशंका है कि नवंबर में बाजार में सप्लाई सीमित हो सकती है।
यूरोप की भीषण गर्मी और सूखे से अनाज उत्पादन में करीब 9 मिलियन टन की कमी का अनुमान है। इसका असर वैश्विक कीमतों के जरिए भारत तक पहुंच सकता है। भारतीय किसानों के लिए ऊंची गेहूं कीमतें और निर्यात अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन खाद्य महंगाई और पशु चारे की लागत भी चिंता का विषय है।