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अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने कहा – भारतीय किसानों के हितों पर सीधा हमला

नई दिल्ली, 05 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अमेरिका और भारत के बीच घोषित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव में आकर देश के हितों से समझौता किया है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस ट्रेड डील में किसानों की मेहनत और खून-पसीने को बेच दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री पर भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है, इसी कारण सरकार संसद में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा से बच रही है।

राहुल गांधी का बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अडानी केस और एपस्टीन फाइल्स से जुड़े संभावित खुलासों का दबाव है। इसी दबाव में आकर उन्होंने अमेरिका के सामने “पूरी तरह सरेंडर” कर दिया।

कांग्रेस का सवाल: फैसला भारत में क्यों नहीं बताया गया?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सीजफायर की तरह इस ट्रेड डील की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी अमेरिका से मिलती है।

कांग्रेस ने मांग की है कि:

  • ट्रेड डील की पूरी जानकारी संसद में रखी जाए
  • कृषि और डेयरी सेक्टर पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हो
  • किसानों की सुरक्षा के ठोस प्रावधान सार्वजनिक किए जाएं

अमेरिका के बयान से बढ़ी किसानों की चिंता

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को कहा कि भारत अमेरिका पर लगाए गए टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को शून्य प्रतिशत तक घटाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत, रूस से तेल खरीद कम कर अमेरिका और वेनेजुएला से आयात बढ़ाएगा।

अमेरिका की कृषि मंत्री ब्रुक रोलिन्स ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए “बड़ी जीत” बताया और कहा कि अब भारत का विशाल बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुलेगा।

ग्राफ: भारत–अमेरिका कृषि व्यापार में बदलाव

आंकड़े दिखाते हैं कि ट्रेड डील से पहले ही अमेरिकी कृषि उत्पादों का भारत में प्रवेश तेज़ हो चुका है, जबकि भारतीय किसानों को सीमित लाभ मिला है।
भारत–अमेरिका कृषि व्यापार: आयात तेज़, निर्यात धीमा

(जनवरी–नवंबर 2025: अमेरिका से भारत कृषि आयात: +34.1% ; भारत से अमेरिका कृषि निर्यात: +5.1%)

भारत–अमेरिका कृषि व्यापार आँकड़े

व्यापार श्रेणी20242025 (जन–नव)वृद्धि
अमेरिका से कृषि आयात$2.12 बिलियन$2.85 बिलियन+34.1%
भारत से कृषि निर्यात$5.35 बिलियन$5.62 बिलियन+5.1%
ड्राई फ्रूट आयात$1.1 बिलियन$1.3 बिलियन+34%

‘मेक इन इंडिया’ पर भी सवाल

कांग्रेस ने पूछा कि यदि अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो मेक इन इंडिया और घरेलू उद्योगों का क्या होगा? क्या सरकार रूस से रणनीतिक दूरी बनाने पर भी सहमत हो गई है?

सरकार का जवाब: किसानों के हित सुरक्षित

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे भारत को मिलने वाले आर्थिक अवसरों में बाधा डालना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने हमेशा कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों की रक्षा की है।

हालांकि, उन्होंने भी ट्रेड डील के विस्तृत प्रावधानों की जानकारी साझा नहीं की, जिससे संदेह और गहरा गया है।

कुलमिलाकर, भारत–अमेरिका ट्रेड डील का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। जब तक समझौते की शर्तें सामने नहीं आतीं, तब तक यह डील किसानों, उद्योग और नीति विशेषज्ञों के लिए एक रहस्य बनी हुई है।

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