नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Gold Price Prediction 2026: सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला अनुमान सामने आया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा लगातार गोल्ड पर बढ़ रहा है। इसी बीच Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटजी प्रमुख Ole Hansen ने दावा किया है कि अगले 12 महीनों में गोल्ड की कीमत 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4490 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो गोल्ड में करीब 33.6% की तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी सीधा पड़ेगा, जहां सोने का भाव नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच सकता है।
भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना?
इस समय भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1.59 लाख रुपये के आसपास है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार की तरह भारतीय बाजार में भी 33% से ज्यादा की तेजी आती है, तो सोना करीब 2.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।
यानी मौजूदा स्तर से लगभग 53 हजार रुपये तक का उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि भारत में सोने की कीमतें केवल इंटरनेशनल मार्केट से तय नहीं होतीं। डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, GST और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
Gold Price Prediction 2026:
| फैक्टर | संभावित असर |
|---|---|
| अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस | कीमत बढ़ने का मुख्य कारण |
| डॉलर-रुपया रेट | रुपये के कमजोर होने पर सोना महंगा |
| आयात शुल्क | टैक्स बढ़ने पर घरेलू कीमत बढ़ती है |
| GST | अंतिम रिटेल कीमत पर असर |
| घरेलू मांग | त्योहार और शादी सीजन में तेजी |
क्यों बढ़ सकती हैं सोने की कीमतें?
Ole Hansen का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ धकेल रही है। ऐसे माहौल में गोल्ड सबसे भरोसेमंद एसेट माना जाता है।
1. डी-ग्लोबलाइजेशन का असर
कोविड के बाद से कई देशों ने सप्लाई चेन और विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर दिया है। वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ने से निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं और गोल्ड की तरफ रुख कर रहे हैं।
2. डी-डॉलराइजेशन की बढ़ती कोशिश
दुनिया के कई देश अब अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। चीन, रूस और कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। इससे सेंट्रल बैंकों की गोल्ड डिमांड मजबूत बनी हुई है।
3. देशों पर बढ़ता सरकारी कर्ज
अमेरिका समेत कई बड़े देशों पर सरकारी कर्ज लगातार बढ़ रहा है। निवेशकों को डर है कि भविष्य में इससे मुद्रास्फीति और करेंसी वैल्यू पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में गोल्ड को सुरक्षित निवेश माना जाता है।
4. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी चिंताओं ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। युद्ध या तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशक तेजी से गोल्ड खरीदते हैं।
5. सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग
शेयर बाजार, बॉन्ड और करेंसी बाजार में बढ़ती अस्थिरता के कारण निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जहां जोखिम कम हो। यही वजह है कि गोल्ड की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
तेल की कीमतें भी बढ़ा सकती हैं दबाव
Gold Price Prediction: रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। ऊंची तेल कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे निवेशक गोल्ड जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ और ज्यादा आकर्षित हो सकते हैं।
Ole Hansen का मानना है कि भले ही भविष्य में तनाव कम हो जाए, लेकिन कच्चे तेल का नया बेस 85-95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है। इसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश रणनीतियों पर देखने को मिल सकता है।
Gold Price Prediction: आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड का बुलिश ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है। यदि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो अगले 12 महीनों में सोना नई रिकॉर्ड ऊंचाई बना सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए भी यह संकेत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में घरेलू बाजार में सोने की कीमतें ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकती हैं।
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