करनाल, 20 फरवरी (कृषि भूमि संवाददाता): हरियाणा के करनाल जिले में कथित धान खरीद (प्रोक्योरमेंट) घोटाले की जांच तेज हो गई है। गुरुवार को पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 26 हो गई है।
इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने घरौंडा मार्केट कमेटी के सचिव चंदर प्रकाश को उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया है। उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
किसान संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
इस बीच भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) के प्रवक्ता बहादुर मेहला बल्दी ने कहा कि संभवतः यह पहला मामला है जब एक ही खरीद घोटाले में इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसान लंबे समय से हर खरीफ और रबी सीजन में गड़बड़ियों की शिकायत करते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई अब जाकर हो रही है। उन्होंने मांग की कि गिरफ्तार लोगों की संपत्ति की समानांतर जांच की जाए और यह देखा जाए कि किसानों के लिए दी गई सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के नाम पर कहीं अवैध संपत्ति तो नहीं बनाई गई।
कई मंडियों में फैला नेटवर्क
बीकेयू (टिकैत गुट) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि जांच की विश्वसनीयता तभी साबित होगी जब सभी दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी।
उनके अनुसार, यह घोटाला करनाल, घरौंडा, इंद्री, निसिंग, असंध और कुंजपुरा की मंडियों तक फैला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अभी भी फरार हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावशाली लोगों को बचाया गया तो किसान यूनियन आंदोलन जारी रखेगी। यह मुद्दा 24 फरवरी को कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में भी उठाया जाएगा।
अन्य गिरफ्तारियां और बरामदगी
पुलिस के अनुसार, पूर्व करनाल मार्केट कमेटी सचिव आशा रानी और जुंडला मार्केट कमेटी सचिव दीपक सुहाग को पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
दोनों से एक-एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार से पूछताछ के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया है।
अब तक SIT ने अधिकारियों, आढ़तियों और राइस मिलरों समेत कुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि यदि संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच होती है, तो घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है। किसानों की मांग है कि MSP और सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
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