नई दिल्ली, 18 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): चालू पेराई सत्र 2025-26 में चीनी उद्योग को शुरुआती महीनों में ही गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फरवरी मध्य तक देश की 78 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जो बीते वर्ष की समान अवधि से अधिक है। उद्योग संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 15 फरवरी 2025 तक 78 मिलों ने पेराई कार्य रोक दिया, जबकि पिछले साल इसी समय 72 मिलें बंद हुई थीं।
गन्ना आपूर्ति में कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
चीनी मिलों को इस बार दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर गन्ने की उपलब्धता कम है, वहीं दूसरी ओर कोल्हू और खांडसारी इकाइयों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलों की मुश्किलें बढ़ा रही है। नकद भुगतान और बेहतर कीमतों के चलते किसान बड़ी संख्या में चीनी मिलों के बजाय कोल्हू-खांडसारी इकाइयों की ओर रुख कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक
उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, वहां 15 फरवरी तक 9 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि 2 मिलें इस सत्र में शुरू ही नहीं हो पाईं। कई अन्य मिलों में फरवरी के अंत तक पेराई बंद होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं महाराष्ट्र में गन्ने में समय से पहले फ्लावरिंग और सीमित आपूर्ति का असर आने वाले हफ्तों में उत्पादन पर दिख सकता है।
चीनी उत्पादन अनुमान में कटौती
पेराई सत्र 2025-26 के लिए ISMA ने शुरुआत में 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह आंकड़ा घटकर करीब 325 लाख टन रहने की संभावना है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, यदि एथेनॉल के लिए 34 लाख टन चीनी का डायवर्जन किया जाता है, तो नेट उत्पादन लगभग 290 लाख टन तक सिमट सकता है।
| विवरण | मात्रा (लाख टन) |
|---|---|
| शुरुआती अनुमान (2025-26) | 349 |
| संभावित नेट उत्पादन | 290 |
| एथेनॉल डायवर्जन | 34 |
| संभावित उपलब्ध चीनी | ~325 |
उत्पादन बढ़ा, लेकिन गन्ने की पेराई घटी
हालांकि 15 फरवरी तक देश में 225 लाख टन चीनी उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल की समान अवधि (197 लाख टन) से अधिक है, लेकिन गन्ने की कुल पेराई में गिरावट दर्ज की गई है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 14 फरवरी तक 662 लाख टन गन्ने की पेराई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 680 लाख टन था।
वर्तमान सीजन में कोल्हू ₹430–440 प्रति क्विंटल तक गन्ने का भाव दे रहे हैं। वहीं गुड़ के दाम ₹45–50 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। गुड़ की रिकवरी चीनी की तुलना में अधिक होने और नकद भुगतान मिलने से किसान तेजी से मिलों से दूर हो रहे हैं।
मार्च तक और मिलें बंद होने की आशंका
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गन्ना आपूर्ति की स्थिति नहीं सुधरी, तो मार्च के अंत तक उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलों में पेराई बंद हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में राज्य में मई तक पेराई चलती है, लेकिन इस बार सीजन समय से पहले खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।
कुलमिलाकर, गन्ना उत्पादन में गिरावट, किसानों का कोल्हू-खांडसारी की ओर झुकाव और एथेनॉल डायवर्जन – ये सभी कारण मिलकर चीनी उद्योग के लिए इस पेराई सत्र को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि उत्पादन में गिरावट कितनी गहरी होती है।
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