लखनऊ, 09 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश सरकार ने गोवंश संरक्षण को नई दिशा देते हुए प्रदेश की गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल न रखकर उन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश की लगभग 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्रों को हरा चारा उत्पादन का मजबूत केंद्र बनाया जाएगा। इससे एक ओर गोवंश को नियमित और पौष्टिक आहार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
‘मिशन फॉडर’ से आत्मनिर्भर होंगी गोशालाएं
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस योजना को “मिशन फॉडर” के तहत लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक गोशाला को 50 से 100 स्थानीय किसानों से जोड़ा जाएगा। इससे चारा उत्पादन, आपूर्ति और विपणन की एक संगठित श्रृंखला तैयार होगी। किसानों को हरा चारा उगाने से नियमित आय के अवसर मिलेंगे, जबकि गोशालाओं को लगातार गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध हो सकेगा।
मोरिंगा और नेपियर घास पर रहेगा विशेष फोकस
मिशन फॉडर के तहत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि पर मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। इसके साथ गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम को भी बढ़ावा दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे उगाए जा सकते हैं, जिससे यह योजना दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बन सकती है।
| प्रमुख चारा | विशेषता | अवधि |
|---|---|---|
| मोरिंगा (सहजन) | उच्च प्रोटीन, जैविक फेंसिंग | 12–15 वर्ष |
| नेपियर घास | अधिक उत्पादन क्षमता | 7–8 वर्ष |
| बरसीम/ज्वार | मौसमी हरा चारा | 3–4 माह |
कम लागत, दीर्घकालिक समाधान
सहजन और नेपियर घास जैसी फसलों की खासियत यह है कि ये लंबे समय तक कम लागत में हरा चारा उपलब्ध कराती हैं। मोरिंगा न केवल पौष्टिक चारा है, बल्कि गोशालाओं में प्राकृतिक छाया और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करता है। वहीं नेपियर घास अपनी तेज वृद्धि और अधिक उपज के कारण नियमित चारा आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
गोवंश स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा
योजना के तहत गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा और दुग्ध उत्पादन बढ़ने की संभावना है। हरे चारे पर निर्भरता बढ़ने से सूखे चारे और बाहरी खरीद पर होने वाला खर्च भी कम होगा, जिससे गोशालाओं की संचालन लागत घटेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लाभ
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अनुसार यह योजना गोवंश संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगी। स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ेगा, भूमि की उर्वरता सुधरेगी और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही यह पहल आत्मनिर्भर गोशाला, कैटल फूड सिक्योरिटी और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
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