नई दिल्ली, 1 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार के वीबी-जी राम जी कानून के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। विधानसभा ने इस कानून को मनरेगा को खत्म करने की सोची-समझी साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि इससे गरीब, दलित और ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी छिन रही है। सदन ने केंद्र सरकार से मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव के समय भाजपा के दो विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।
प्रस्ताव पेश करते हुए कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि वीबी-जी राम जी कानून का सबसे ज्यादा असर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना केवल एक योजना को बंद करना नहीं, बल्कि गरीब और दलित समुदायों के जीवन के अधिकार पर हमला है।
आप सरकार ने बुलाया विशेष सत्र, सियासत तेज
आम आदमी पार्टी सरकार ने मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी कानून लाने के विरोध में विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। इस पूरे मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) की चुप्पी पर भी सवाल उठे। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के साथ संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को दलित और मजदूर हितों से जोड़कर सामने ला रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का हमला
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नए कानून को गरीब, दलित, किसान, मजदूर और महिलाओं के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला गरीबों के “चूल्हे बुझाने” जैसा है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी दलितों और गरीब मजदूरों की आवाज़ बनकर प्रधानमंत्री के सामने मनरेगा का मुद्दा उठाएगी।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इसे केवल गरीबों पर नहीं, बल्कि फेडरलिज्म पर हमला करार दिया।
भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
चर्चा के दौरान सदन में मौजूद अकेले भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए भ्रम फैला रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा वर्ष में मनरेगा के तहत औसतन केवल 26 दिन का रोजगार दिया गया, जबकि पिछले तीन वर्षों में यह औसत 38 दिन रहा।
शर्मा ने मनरेगा में सोशल ऑडिट न होने और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। प्रस्ताव पारित होने के बाद वे सदन से बाहर चले गए।
आप मंत्रियों का पलटवार
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना केवल दिखावा है, क्योंकि मजदूरों को महीनों तक मजदूरी नहीं मिलती।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने एक महिला मनरेगा मजदूर का पत्र पढ़ते हुए कहा कि नियमों में बदलाव और केंद्रीकरण से गरीब परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा।
कांग्रेस का समर्थन, आगे की कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि केवल निंदा प्रस्ताव पारित करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने ठोस विरोध दर्ज कराना चाहिए।
विशेष सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक मनरेगा मजदूरों द्वारा लिखे गए लाखों पत्र लेकर विधानसभा पहुंचे। मनरेगा मजदूर भी बड़ी संख्या में विधानसभा परिसर में मौजूद थे। पंजाब सरकार ने इन पत्रों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
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