मुंबई, 26 नवंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): इस कारोबारी हफ्ते के तीसरे दिन चांदी के भाव में मामूली तेजी दर्ज हुई। कल चांदी का रेट करीब 4,000 रुपये तक चढ़ा था और आज इसमें लगभग 100 रुपये की और बढ़त देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में चांदी का रेट ₹1,67,100 प्रति किलोग्राम पर बना रहा।
उत्तर भारत के कई हिस्सों यूपी, बिहार और दिल्ली के साथ मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद जैसे शहरों में पिछले दिनों चांदी के दाम गिरते दिखे थे, लेकिन अब यह गिरावट थमती नजर आ रही है।
पिछले महीने चांदी की कीमतें एक समय ₹2,06,000 प्रति किलोग्राम तक जा पहुंची थीं। उसके बाद भाव काफी नीचे आए और आज भी उन ऊंचे स्तरों से काफी दूर हैं। यानी दाम कुछ स्थिर जरूर हुए हैं, पर पुराने पीक से अभी भी कम हैं।
वैश्विक या घरेलू आंकड़ों के उदाहरण से देखा जाए तो 25 नवंबर को प्रकाशित कुछ रिपोर्टों में घरेलू चांदी की कीमतों में उतार‑चढ़ाव का जिक्र मिलता है; पिछले सत्र में 1 किलोग्राम 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत ₹1,53,650 दर्ज हुई थी, जो एक दिन पहले के मुकाबले गिरावट थी। आज के रेट इससे भी ऊंचे दर्ज हो रहे हैं, जिससे मांग‑आपूर्ति या बाजार धारणा में बदलाव समझा जा सकता है।
मुंबई, राजस्थान, यूपी, बिहार सहित अन्य शहरों में आज का रेट
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक आज 26 नवंबर 2025 को प्रमुख शहरों में चांदी का रेट इस प्रकार रहा:
| शहर | 1 किलोग्राम चांदी की कीमत (₹) |
|---|---|
| दिल्ली | 1,67,100 |
| मुंबई | 1,67,100 |
| अहमदाबाद | 1,67,100 |
| चेन्नई | 1,74,100 |
| कोलकाता | 1,67,100 |
| गुरुग्राम | 1,67,100 |
| लखनऊ | 1,67,100 |
| बेंगलुरु | 1,67,100 |
| जयपुर | 1,67,100 |
| पटना | 1,67,100 |
| भुवनेश्वर | 1,67,100 |
| हैदराबाद | 1,74,100 |
उत्तर भारत और दक्षिण भारत में लगभग ₹7,000 प्रति किलोग्राम का अंतर दिखा, जहां चेन्नई व हैदराबाद जैसे दक्षिणी शहरों में भाव ऊँचे रहे। राजस्थान, यूपी, बिहार जैसे क्षेत्रों में दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पटना के आंकड़े लगभग समान रहे, लगभग ₹1,67,100, जो एक प्रकार से मध्य‑स्तर की स्थिरता दर्शाते हैं।
इंडस्ट्री में बढ़ती मांग और चांदी के दाम
चांदी का उपयोग अब सिर्फ गहनों या पूजा‑सामग्री तक सीमित नहीं रहा।
- इलेक्ट्रॉनिक उद्योग: मोबाइल, कंप्यूटर चिप, सर्किट, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी की उच्च चालकता और गुणकारी विशेषताएँ उसे जरूरी बनाती हैं।
- सोलर पैनल: सोलर वर्टिकल्स और अन्य उर्जा उपकरणों में भी चांदी का इस्तेमाल बढ़ा है।
इन उद्योगों में चांदी की खपत पहले की तुलना में बहुत तेज़ी से बढ़ी है, जिससे मांग‑आपूर्ति का दबाव दामों पर पड़ रहा है। इस वजह से, भले ही भाव कुछ दिन गिरते रहे हों, लेकिन लंबे समय में कीमतों पर स्थिरता या उछाल देखने को मिल सकता है।
अब चांदी पहले से ज्यादा महंगी और बहुआयामी उपयोग वाली धातु बन चुकी है—जो घरेलू निवेशक, आभूषण खरीदार और उद्योग दोनों के पक्ष में महत्वपूर्ण चलन बनाता है।
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