मुंबई, 25 नवम्बर, 2025 (कृषि भूमि ब्यूरो): कर्नाटक में किसानों के मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक रूप से गर्मा गए हैं। राज्य में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसान मोर्चा ने कांग्रेस सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों और समस्याओं की अनदेखी के विरोध में चार दिवसीय विरोध प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। यह विरोध प्रदर्शन राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार पर किसानों की प्रमुख मांगों को तुरंत पूरा करने का दबाव बनाना है।
विरोध प्रदर्शन के प्रमुख कारण और माँगे
BJP किसान मोर्चा का यह आंदोलन मुख्य रूप से राज्य के गन्ना किसानों और अन्य फसलों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है, जिन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए हैं।
गन्ने का उचित मूल्य (Sugarcane MSP): किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि राज्य सरकार गन्ने का उचित मूल्य (Fair and Remunerative Price) कम से कम ₹3,500 प्रति टन निर्धारित करे।1 किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा तय किया गया मौजूदा मूल्य बहुत कम है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
खाद और बीज की कमी: बीजेपी किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि राज्य में उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) और अच्छे बीजों की भारी कमी है, जिसके कारण कालाबाजारी बढ़ गई है।3 किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
आपदा राहत में देरी: राज्य में बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने में सरकार द्वारा देरी करने और प्रशासनिक उदासीनता को भी विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
वादे पूरे न करना: बीजेपी किसान मोर्चा ने कांग्रेस सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए किसान हितैषी वादों (जैसे विवादित भूमि कानूनों को रद्द करना) को पूरा न करने का भी आरोप लगाया है।
विरोध प्रदर्शन की रणनीति
BJP के किसान मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह चार दिवसीय आंदोलन राज्य सरकार को जगाने के लिए किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन उत्तर कर्नाटक के उन जिलों पर केंद्रित होगा जो गन्ना उत्पादन और हालिया हिंसक आंदोलनों से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं, जैसे बेलगावी, बागलकोट और धारवाड़।
बीजेपी नेता सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री सत्ता संघर्ष में व्यस्त हैं, जिसके कारण किसानों की समस्याओं की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।4 बीजेपी का कहना है कि वे तब तक किसानों के साथ खड़े रहेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती।
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