नई दिल्ली, 8 सितंबर (कृषि भूमि ब्यूरो):
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को लेकर बातचीत एक बार फिर गति पकड़ रही है। दोनों पक्ष इस सप्ताह नई दिल्ली में नए दौर की वार्ता शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें कृषि उत्पादों, शुल्क कटौती और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
व्यापारिक रिश्तों में नया मोड़
यह वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। दोनों पक्ष 2025 के अंत तक एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर करने की इच्छा जता चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस बार की बातचीत में कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क, फलों, सब्जियों, अनाज और डेयरी उत्पादों की एक्सेस, और स्वच्छता/पादप स्वच्छता (SPS) मानकों के सरलीकरण पर विशेष ध्यान रहेगा। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को यूरोपीय बाज़ार में बेहतर दरों और कम प्रतिबंधों के साथ पहुंच मिले।
भारत की प्राथमिकताएँ
भारत इस समझौते के ज़रिए न केवल कृषि निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है, बल्कि MSME, टेक्सटाइल, और दवा उद्योग के लिए भी बाजार खुलवाने की कोशिश में है। कृषि क्षेत्र को लेकर भारत की प्रमुख माँगें हैं:
- EU द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों पर लगाए गए कड़े गुणवत्ता मानकों में लचीलापन
- टैरिफ रियायतें, जिससे उत्पाद प्रतिस्पर्धी बन सकें
- जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग वाले उत्पादों की पहचान और सुरक्षा
EU की मांगें
दूसरी ओर, EU की प्राथमिकता है कि भारत इंपोर्ट ड्यूटी में कमी करे, विशेष रूप से वाइन, प्रोसेस्ड फूड, पनीर और चॉकलेट जैसे उत्पादों पर। EU का कहना है कि भारतीय बाज़ार में इनके लिए काफी संभावनाएँ हैं, जिन्हें मौजूदा नीतियाँ सीमित कर रही हैं।
बता दें, भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद के चलते इसे 2013 में स्थगित कर दिया गया था। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव और चीन के प्रभुत्व के जवाब में भारत–EU के रिश्तों में फिर से गर्माहट आई है।
2022 में दोबारा वार्ता शुरू हुई, और अब तक कई राउंड हो चुके हैं। यह नया दौर, जिसे ‘संवेदनशील समझौता’ कहा जा रहा है, अंतिम समझौते की नींव रख सकता है।
संभावनाएँ और प्रभाव
अगर यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो यह भारत के कृषि निर्यातकों के लिए यूरोप जैसे बड़े और उच्च-मूल्य बाजारों में प्रवेश का द्वार खोल सकता है। यह कृषक आय बढ़ाने, रोज़गार सृजन और आर्थिक स्थायित्व में भी मददगार हो सकता है।
हालांकि, घरेलू उत्पादकों को यूरोपीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए समझौते की शर्तों को बेहद संतुलित ढंग से तय करना होगा।
भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते पर यह नया दौर निर्णायक साबित हो सकता है। कृषि उत्पादों और बाज़ार पहुंच जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनी, तो यह भारत के किसानों और निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। अब निगाहें इस हफ्ते होने वाली बैठकों पर टिकी हैं, जहाँ भविष्य की दिशा तय होगी।
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