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नई दिल्ली, 04 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो): 

रसायनिक कीटनाशकों (Chemical Pesticides) पर बढ़ती निर्भरता, किसानों की लागत और पर्यावरणीय क्षति — इन तीनों समस्याओं का समाधान अब ICAR–CIPHET, लुधियाना की नवीनतम खोज से मिलने की उम्मीद है। संस्थान ने एक सौर ऊर्जा (Solar Energy) चालित “डे-नाइट कीट ट्रैप” (Day-Night Insect Trap) तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी रसायन के कीट नियंत्रण की सशक्त प्रणाली प्रस्तुत करती है।

लुधियाना के ICAR–CIPHET की तकनीक की विशेषताएँ:

– यह यंत्र 100% सौर ऊर्जा से संचालित होता है, जिससे इसे खेतों में दिन-रात कार्यशील रखा जा सकता है।

– इसमें ब्लू एलईडी लाइट, फेरोमोन ल्यूअर, और स्टिकी ट्रैप शीट्स का उपयोग किया गया है जो प्रमुख कीटों को आकर्षित कर पकड़ने का कार्य करती हैं।

– रसायनिक छिड़काव की आवश्यकता न के बराबर हो जाती है, जिससे मिट्टी और फसल की गुणवत्ता बनी रहती है।

CIPHET द्वारा पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों में इस तकनीक का पायलट परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि कीटनाशकों की खपत में 60–70% तक की कमी देखी गई। छोटे किसानों की कुल खेती लागत में 15–20% तक की कटौती हुई। इसके अलावा पर्यावरणीय प्रदूषण और परागण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों में भी गिरावट आई।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक सिर्फ कीट नियंत्रण नहीं करती, बल्कि किसानों को पर्यावरण के अनुकूल, लागत-कटौती आधारित और दीर्घकालिक कृषि समाधान देती है।”

किसानों के लिए क्या फायदा?

छोटे और सीमांत किसान जो कीटनाशकों पर खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए यह यंत्र एक सुलभ और स्थायी विकल्प बनकर उभरा है। इस यंत्र को सरकारी अनुदान योजनाओं में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

वर्तमान में यह यंत्र प्रायोगिक रूप से चुने हुए जिलों में वितरित किया जा रहा है। भविष्य में इसे “एक जिला, एक तकनीक” योजना के तहत पूरे देश में विस्तार देने की योजना है। इसकी लागत ₹2,500–₹3,000 के बीच अनुमानित है — जो एक सीजन में ही वसूल की जा सकती है।

 

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