[polylang_langswitcher]

हॉर्मुज संकट का भारत पर असर: गैस घटी, यूरिया उत्पादन आधा – खेती पर मंडराया संकट

नई दिल्ली, 17 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा का असर अब सीधे भारत के कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। एलएनजी (LNG) सप्लाई प्रभावित होने से देश के यूरिया संयंत्रों की उत्पादन क्षमता बुरी तरह घट गई है।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कई संयंत्र अब आधी क्षमता पर चल रहे हैं, जिससे यूरिया उत्पादन में करीब 50% तक गिरावट दर्ज की गई है।

सप्लाई 60–65% तक सिमटी, कंपनियों पर दबाव

देश की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी Petronet LNG Limited ने ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित किया है, क्योंकि आपूर्तिकर्ता तय मात्रा में गैस देने में असमर्थ हैं।

इसका सीधा असर गैस वितरण कंपनियों—GAIL, Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum—पर पड़ा है, जिन्होंने उर्वरक संयंत्रों को गैस सप्लाई में कटौती कर दी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में गैस सप्लाई सामान्य स्तर के केवल 60–65% तक सीमित रह गई है, जबकि कुछ संयंत्रों में यह 50% से भी नीचे पहुंच चुकी है।

उत्पादन आधा, लेकिन ऊर्जा खर्च बढ़ा

गैस की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। कई प्रमुख संयंत्रों में यूरिया उत्पादन लगभग 50% तक गिर गया है।

दिलचस्प और चिंताजनक तथ्य यह है कि उत्पादन घटने के बावजूद ऊर्जा खपत करीब 40% तक बढ़ गई है। इसका कारण यह है कि संयंत्रों को कम लोड पर चलाने से उनकी कार्यक्षमता घट जाती है, जिससे प्रति यूनिट उत्पादन पर ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है।

तकनीकी जोखिम और सुरक्षा चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अमोनिया-यूरिया संयंत्रों को बार-बार लोड बदलने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। अचानक उत्पादन घटाने या बढ़ाने से मशीनरी पर दबाव बढ़ता है, जिससे प्लांट ट्रिप, उपकरण खराबी और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

इसके अलावा, कंपनियों का कहना है कि गैस खपत से जुड़े निर्देश कई बार देर रात जारी किए जा रहे हैं, जिससे प्लांट संचालन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

नई कीमत व्यवस्था से बढ़ेगा वित्तीय दबाव

गैस संकट के बीच GAIL ने 1 मार्च 2026 से एलएनजी की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला लागू किया है, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट प्राइस, पूल्ड प्राइस और गजट पूल्ड प्राइस शामिल हैं।

इस बदलाव से पहले से दबाव झेल रही उर्वरक कंपनियों की लागत और बढ़ सकती है, जिससे उत्पादन और सप्लाई पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका है।

खरीफ सीजन पर मंडराता खतरा

भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। हालांकि 19 मार्च तक देश में यूरिया का स्टॉक 61.14 लाख टन दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 55.22 लाख टन से अधिक है।

फिर भी, यदि गैस सप्लाई में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है, तो खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों के लिए लागत और उत्पादन दोनों पर दबाव बढ़ेगा।

ऊर्जा संकट से खेती तक असर

हॉर्मुज संकट ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में छोटी सी बाधा भी कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। एलएनजी पर निर्भरता, सप्लाई चेन की नाजुकता और वैश्विक तनाव—ये सभी मिलकर भारत के उर्वरक सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेतों तक इसका असर साफ दिखाई देगा।

===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची