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मार्च में शाकाहारी थाली की लागत स्थिर, मांसाहारी थाली सस्ती; टमाटर, तेल और ईंधन बने महंगाई के कारण

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नई दिल्ली 06 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): मार्च 2026 में घरेलू बजट पर खाद्य महंगाई का असर सीमित रहा, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, घर पर तैयार की जाने वाली शाकाहारी थाली की लागत साल-दर-साल आधार पर लगभग स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट बताती है कि प्याज, आलू और दालों जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने उपभोक्ताओं को राहत दी। हालांकि, टमाटर, खाद्य तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने इस राहत को काफी हद तक संतुलित कर दिया।

टमाटर, तेल और ईंधन ने बढ़ाया दबाव

थाली की लागतमार्च 2026 में टमाटर की कीमतों में 33% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह औसतन 28 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इसका मुख्य कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में रोपाई में देरी रही, जिससे उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई।

इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के कारण खाद्य तेल की कीमतों में लगभग 6% की वृद्धि हुई। वहीं, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 14% की बढ़ोतरी ने रसोई खर्च को और बढ़ा दिया। इन कारकों ने शाकाहारी थाली की कुल लागत को नीचे आने से रोके रखा।

सस्ती सब्जियों से मिली राहत

दूसरी ओर, कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने राहत दी। प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 25% की कमी आई, जिसका कारण अधिक आवक और कमजोर निर्यात रहा। आलू की कीमतों में 13% की गिरावट दर्ज की गई, जो मांग में कमी के चलते संभव हुई।

दालों की कीमतों में भी करीब 6% की कमी आई, जिसका कारण पर्याप्त स्टॉक रहा। तूर और चना की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत रही, जिससे कीमतों पर दबाव बना।


मांसाहारी थाली क्यों हुई सस्ती

मांसाहारी थाली की लागत में 1% की गिरावट मुख्य रूप से ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 2% कमी के कारण आई। रिपोर्ट के अनुसार, चिकन कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा होता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर पड़ता है।

नवरात्र जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान मांसाहार की मांग में कमी भी कीमतों में गिरावट का एक अहम कारण रही। इसके अलावा, सस्ती सब्जियों ने भी मांसाहारी थाली की लागत को कम करने में योगदान दिया।


थाली की लागत: मासिक आधार पर दिखी गिरावट

मार्च में महीने-दर-महीने आधार पर भी राहत देखने को मिली। शाकाहारी थाली की लागत में 3% और मांसाहारी थाली में 2% की कमी आई। इसका मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में गिरावट रहा।

टमाटर और आलू की कीमतों में लगभग 6% की कमी आई, जबकि प्याज 14% तक सस्ता हुआ। अधिक आवक और कमजोर मांग के चलते यह गिरावट संभव हो पाई।

यूँ होता है थाली की लागत पर असर

घटकमूल्य रुझान (मार्च 2026)प्रभाव
टमाटर+33%लागत बढ़ी
प्याज-25%राहत
आलू-13%राहत
दालें-6%राहत
खाद्य तेल+6%लागत बढ़ी
एलपीजी+14%लागत बढ़ी
ब्रॉयलर चिकन-2%मांसाहारी थाली सस्ती

मार्च 2026 में थाली की लागत पर मिला-जुला असर देखने को मिला। जहां सस्ती सब्जियों और दालों ने आम उपभोक्ताओं को राहत दी, वहीं टमाटर, खाद्य तेल और ईंधन की महंगाई ने इस राहत को सीमित कर दिया। आने वाले महीनों में मौसम, आपूर्ति और वैश्विक कारकों के आधार पर खाद्य महंगाई की दिशा तय होगी।

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