फरवरी में थोक महंगाई बढ़कर 2.13%, खाने-पीने की चीजों में भी तेजी

नई दिल्ली, 17 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): फरवरी 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.13% हो गई, जो जनवरी में 1.81% थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स, बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल्स और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है।

महीने-दर-महीने आधार पर भी WPI में 0.25% की बढ़त दर्ज की गई, जो कीमतों में लगातार दबाव का संकेत देती है।

खाद्य महंगाई भी बढ़ी, लेकिन राहत भी

खाद्य वस्तुओं की महंगाई फरवरी में बढ़कर 1.85% हो गई, जो जनवरी में 1.41% थी। हालांकि, कुछ जरूरी सब्जियों में बड़ी राहत भी देखने को मिली।

खाद्य वस्तुओं का रुझान

श्रेणीबदलाव
प्याज-40.95%
आलू-27.42%
दालें-5.92%
गेहूं-4.43%
सब्जियां (कुल)+4.73%
फल+3.57%
दूध+3%
अंडा/मांस/मछली+5.36%

जहां प्याज और आलू की कीमतों में भारी गिरावट आई, वहीं फल, दूध और प्रोटीन आधारित खाद्य महंगे हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना बड़ा कारण

थोक महंगाई बढ़ने में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसका WPI में 64.23% भार है। फरवरी में इस श्रेणी का सूचकांक 0.47% बढ़ा। कुल 22 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में से 16 में कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई।

खासतौर पर खाद्य उत्पाद, वस्त्र (टेक्सटाइल्स), रसायन और इलेक्ट्रिकल उपकरण सेक्टर्स में तेजी देखी गई। वहीं बेसिक मेटल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और लकड़ी उत्पादों में गिरावट दर्ज हुई।

ईंधन और ऊर्जा की कीमतों का असर

ईंधन और ऊर्जा समूह में फरवरी में 1.17% की वृद्धि हुई। इसका मुख्य कारण खनिज तेल (मिनरल ऑयल) की कीमतों में 2.05% की बढ़ोतरी रहा, जबकि बिजली की कीमतों में हल्की गिरावट (-0.27%) दर्ज की गई।

यह संकेत देता है कि वैश्विक तेल कीमतों का असर घरेलू महंगाई पर जारी है।

प्राथमिक वस्तुओं में मिली-जुली तस्वीर

प्राथमिक वस्तु समूह में फरवरी में 0.52% की गिरावट दर्ज हुई।

  • खाद्य वस्तुएं: -1.33%
  • खनिज: -1.21%
  • कच्चा पेट्रोलियम और गैस: +4.17%
  • गैर-खाद्य वस्तुएं: +0.83%

यह दर्शाता है कि कुछ क्षेत्रों में राहत है, लेकिन ऊर्जा और कच्चे संसाधनों में दबाव बना हुआ है। फरवरी 2026 में WPI महंगाई का बढ़ना यह संकेत देता है कि लागत का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और ईंधन सेक्टर में।

हालांकि, प्याज और आलू जैसी जरूरी वस्तुओं में गिरावट से आम उपभोक्ता को कुछ राहत जरूर मिली है। आने वाले महीनों में वैश्विक कमोडिटी कीमतें और घरेलू सप्लाई स्थिति तय करेगी कि महंगाई किस दिशा में जाएगी।

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