रिपोर्ट: बिचित्र शर्मा
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में रहने वाले 76 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल सुभाष कपिला और उनकी पत्नी उर्मिला कपिला ने प्रभाग के किसनों के लिए हल्दी की खेती कर मिसाल कायम कर दी है।
प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई नए उपक्रम शुरू किये है. दरअसल प्राकृतिक विधि से उगाई गई फसलों के लिए सरकार ने प्रोत्साहक मूल्य तय किया है. इसी उपक्रम का लाभ उठाते हुए भोरंज उपमंडल की भुक्कड़ पंचायत के गांव बैरी ब्राह्मणा निवासी 76 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुभाष कपिला और उनकी पत्नी ने मौजूदा सीजन में करीब 10 क्विंटल हल्दी का उत्पादन किया है। इसी कड़ी में प्राकृतिक खेती से उगाई गई कच्ची हल्दी को 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसान हल्दी की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जिस कारण किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही हैं।
सुभाष कपिला शिक्षा विभाग से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनका बेटा पेशे से डेंटल सर्जन है और बहू सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद कपिला दंपत्ति ने खेती से नाता नहीं तोड़ा और रासायनिक खाद व कीटनाशकों से दूर रहकर प्राकृतिक खेती को अपनाया।
उन्होंने कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा सहित अन्य अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया और विभाग से हल्दी के बीज भी प्राप्त किये ।
सुभाष कपिला का कहना है कि हल्दी की खेती में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और जंगली जानवर भी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके अलावा इसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। सरकार द्वारा 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद किए जाने के कारण यह फसल किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है।
प्राकृतिक खेती के माध्यम से सफल उत्पादन कर कपिला दंपत्ति आज क्षेत्र के किसानों और बागवानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उम्र किसी के लिए बाधा नहीं हो सकती है|
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45