Rice Procurement ख़बर संक्षेप में: खरीफ सीजन में रिकॉर्ड चावल खरीद (Rice) – खरीफ सीजन 2025-26 में सरकार ने रिकॉर्ड चावल खरीद की है। मार्च में जबरदस्त उछाल और राज्यों के आंकड़े ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
नई दिल्ली, 03 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान चावल की खरीद (Rice Procurement) में नया रिकॉर्ड बनाया है।
इस अवधि में कुल 463.06 लाख टन चावल सरकारी गोदामों में जमा किया गया, जो पिछले साल के 454.36 लाख टन से करीब 6 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी न केवल सरकारी खरीद प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य मिलने का भी संकेत देती है।
सरकार ने इस सकारात्मक रुझान को देखते हुए अपने अखिल भारतीय खरीद लक्ष्य को भी 477 लाख टन से बढ़ाकर 487 लाख टन कर दिया है। यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मार्च में जबरदस्त वापसी
Rice Procurement – फरवरी महीने में खरीद में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया था। लेकिन मार्च आते-आते स्थिति पूरी तरह बदल गई। इस महीने चावल खरीद में लगभग 10 गुना की तेज बढ़ोतरी हुई।
मार्च 2026 में 21 लाख टन से अधिक चावल खरीदा गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा केवल 2 लाख टन था। इस उछाल ने पूरे सीजन के आंकड़ों को मजबूत आधार प्रदान किया।
Rice Procurement – राज्यों में खरीद की स्थिति
देश के अधिकांश राज्यों में खरीफ सीजन की खरीद 31 मार्च तक पूरी हो चुकी है। हालांकि कुछ राज्यों में किसानों की सुविधा के लिए खरीद अवधि बढ़ाई गई है।
- ओडिशा: 7 अप्रैल तक
- पश्चिम बंगाल: 30 अप्रैल तक
- त्रिपुरा: 31 मई तक
- असम: 30 जून तक
फसल के जल्दी पकने के कारण इस बार खरीद प्रक्रिया भी पहले शुरू की गई। पंजाब और हरियाणा में सितंबर के मध्य से, जबकि तमिलनाडु में 1 सितंबर से खरीद शुरू हो गई थी।
प्रमुख राज्यों में चावल खरीद (लाख टन में)
| राज्य | खरीद (लाख टन) | बदलाव (%) |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 41.75 | +8% |
| मध्य प्रदेश | 34.67 | +19% |
| ओडिशा | 52.07 | +30% |
| छत्तीसगढ़ | 73.00+ | — |
| आंध्र प्रदेश | 27.87 | बड़ा उछाल |
| पश्चिम बंगाल | 27.87 | स्थिर |
| तेलंगाना | 39.49 | — |
| पंजाब | 104.86 | -9.7% |
| हरियाणा | 35.96 | लगभग समान |
| बिहार | 24.96 | -5% |
| तमिलनाडु | 16.00 | -17% |
| महाराष्ट्र | 6.74 | — |
| उत्तराखंड | 5.02 | — |
ओडिशा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जबकि पंजाब और तमिलनाडु में गिरावट दर्ज की गई।
क्षेत्रीय असमानता और नीति प्रभाव
जहां एक ओर ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने रिकॉर्ड योगदान दिया, वहीं पंजाब में गिरावट यह संकेत देती है कि उत्पादन पैटर्न और सरकारी नीति में बदलाव का असर दिख रहा है। तेलंगाना में भी राज्य सरकार की अधिक आपूर्ति की इच्छा के बावजूद केंद्र ने तय सीमा से अधिक खरीद से इनकार कर दिया।
अब रबी सीजन पर फोकस
खरीफ सीजन के बाद अब सरकार रबी सीजन (अप्रैल से सितंबर) की तैयारी में जुट गई है। इस अवधि के लिए 79.57 लाख टन चावल खरीद का लक्ष्य तय किया गया है।
इस लक्ष्य में सबसे बड़ा योगदान तेलंगाना से अपेक्षित है, जहां से 35 लाख टन खरीदने की योजना है। इसके अलावा तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश भी प्रमुख योगदान देंगे।
उत्पादन में भी वृद्धि का अनुमान
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 के खरीफ सीजन में चावल उत्पादन 123.93 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल से 1 प्रतिशत अधिक है। वहीं रबी सीजन में उत्पादन 16.72 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 16.13 मिलियन टन से अधिक है।
क्या कहता है यह ट्रेंड?
Rice Procurement-चावल की रिकॉर्ड खरीद और बढ़ते उत्पादन के संकेत यह दर्शाते हैं कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। सरकारी हस्तक्षेप, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बेहतर मौसम परिस्थितियों ने मिलकर इस सकारात्मक ट्रेंड को जन्म दिया है।
हालांकि, कुछ राज्यों में गिरावट और क्षेत्रीय असमानता यह भी बताती है कि भविष्य की नीति में संतुलन बनाना जरूरी होगा।
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