मुंबई, 17 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): देश के पहले ‘मुंबई क्लाइमेट वीक’ का उद्घाटन करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन से निपटना अब केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धा की कुंजी बन चुका है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों के नेतृत्व के लिए पूरी तरह तैयार है और मुंबई क्लाइमेट वीक इस दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन गया है। मुंबई जैसे तटीय महानगर में अतिवृष्टि, बाढ़ और लू जैसी घटनाएं न केवल जनजीवन बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और सूखे से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंच पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्य की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे, प्रोजेक्ट मुंबई के संस्थापक शिशिर जोशी, एमएमआरडीए महानगर आयुक्त संजय मुखर्जी तथा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के निदेशक मार्टिन क्राउस सहित कई खास व्यक्ति उपस्थित थे। सम्मेलन का आयोजन जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में किया गया।
जलवायु कार्रवाई और आर्थिक अवसर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र जलवायु कार्रवाई को केवल नियमों के अनुपालन के रूप में नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन के बड़े अवसर के रूप में देखता है। वैश्विक पूंजी तेजी से टिकाऊ बाजारों की ओर बढ़ रही है और जो राज्य इस परिवर्तन को शीघ्र अपनाएंगे, वही भविष्य में प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य 2030 तक हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके तहत स्वच्छ हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, जैव ईंधन और टिकाऊ शहरी अवसंरचना को प्राथमिकता दी जा रही है।
जलवायु वित्त पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक बड़े निवेश केवल सार्वजनिक संसाधनों से संभव नहीं हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुंबई वैश्विक जलवायु वित्त का एक प्रभावी केंद्र बन सकती है और जलवायु न्याय को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।
पीएम-कुसुम में महाराष्ट्र का प्रदर्शन, एक लाख अतिरिक्त सौर पंप
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने घोषणा की कि पीएम-कुसुम योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते महाराष्ट्र को एक लाख अतिरिक्त सौर पंपों की मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि मुंबई क्लाइमेट वीक इस बात का संकेत है कि भारत में जलवायु चर्चा अब ठोस कार्रवाई में बदल रही है। सौर, पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।
इस अवसर पर विशेष स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया गया और एमएमआरडीए व UNEP के बीच मुंबई के लिए जलवायु-अनुकूल योजना तैयार करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही C40 Cities Climate Leadership Group के साथ भी शहरी जलवायु उपायों को मजबूत करने पर सहमति बनी।
युवाओं की भूमिका अहम: पंकजा मुंडे
पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि जलवायु कार्रवाई में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि सामुदायिक जागरूकता, जलवायु साक्षरता और युवा पहलें एक टिकाऊ महाराष्ट्र की नींव रख सकती हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई क्लाइमेट वीक केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि क्रियान्वयन और वित्तपोषण को गति देने वाला उपक्रम है।
उन्होंने बढ़ते शहरी तापमान, बाढ़, तटीय दबाव और वायु गुणवत्ता में गिरावट जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जलवायु-संवेदनशील विकास ही भविष्य का रास्ता है।
30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले इस सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के शहरों ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई सामूहिक जिम्मेदारी है और ठोस परिणाम ही इस पहल की सफलता का पैमाना होंगे।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45