Millet News : कभी ग्रामीण और गरीबों के भोजन का प्रमुख हिस्सा माना जाने वाला बाजरा (Millets), आज ग्लोबल ‘सुपरफूड’ बाज़ार में अपनी मजबूत जगह बना रहा है। बदलते उपभोक्ता रुझानों और स्वास्थ्य-जागरूकता के चलते अब शहरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
फाइबर, आयरन, प्रोटीन और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स से भरपूर बाजरा मधुमेह (Diabetes,), हृदय रोग (Heart Disease) और मोटापे (Obesity) से जूझ रहे लोगों के लिए एक आदर्श आहार माना जा रहा है। यही कारण है कि अब यह पारंपरिक अनाज फैशनबल फूड ट्रेंड बन चुका है — बाजरा कुकीज़, पिज्जा बेस, पास्ता और ड्रिंक्स तक में इसका उपयोग हो रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बाजरे की खेती कम लागत, कम पानी और बंजर ज़मीन पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसकी कृषि इनपुट लागत गेहूं या धान से 40-50% कम होती है, जबकि बाजार मूल्य कहीं अधिक मिलता है।
सरकार ने भी इसे बढ़ावा देने के लिए ‘श्री अन्न योजना’, MSP में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग जैसे कई प्रयास किए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया था, जिससे भारत को निर्यात बढ़ाने का अवसर मिला।
किसानों के लिए यह एक दोहरा लाभ है—स्वस्थ फसल और स्वस्थ मुनाफा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ दिया जाए, तो बाजरा भारत के ‘न्यू एरा कैश क्रॉप’ (New Era Cash Crop)के रूप में उभर सकता है।