Latest Commodity News: फ्लोर मिलों की मांग बढ़ने से दिल्ली में गेहूं के भाव में सुधार, दैनिक आवक में गिरावट

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नई दिल्ली, 2 सितंबर (कृषि भूमि ब्यूरो):

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की मंडियों में गेहूं के भाव में हाल ही में सुधार दर्ज किया गया है। इसका प्रमुख कारण फ्लोर मिलों (आटा चक्कियों) की ओर से बढ़ती मांग है, जबकि दूसरी ओर दैनिक आवक (सप्लाई) में कमी देखी जा रही है, जिससे बाजार में सप्लाई और डिमांड के बीच असंतुलन बन गया है।

दिल्ली की प्रमुख अनाज मंडियों — जैसे नरेला, गाजीपुर, और आजादपुर — में आज गेहूं का भाव ₹2,460 से ₹2,500 प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार करता देखा गया, जो कि पिछले सप्ताह के मुकाबले ₹30–₹50 प्रति क्विंटल की तेजी को दर्शाता है।

बाजार सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में रोज़ाना करीब 25,000–28,000 क्विंटल गेहूं की आवक हो रही है, जबकि सामान्य स्थिति में यह आंकड़ा 35,000–38,000 क्विंटल तक होता है। आवक में यह गिरावट किसानों द्वारा स्टॉक होल्ड करने और अन्य राज्यों से आपूर्ति में कमी के कारण आई है।

सितंबर महीने में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही फ्लोर मिलों द्वारा आटे की प्रोसेसिंग के लिए गेहूं की खरीद में इज़ाफा हुआ है। बढ़ती उपभोक्ता मांग और थोक विक्रेताओं के बढ़ते ऑर्डर ने मिलों को अधिक स्टॉक बनाने के लिए प्रेरित किया है। इससे मांग में असामान्य तेजी आई है।

‘कृषि भूमि’ से बात करते हुए एक फ्लोर मिल मालिक ने बताया, “फेस्टिव सीज़न और शादियों के ऑर्डर को देखते हुए हम अभी से गेहूं का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। मंडियों में आवक कम है, इसलिए दाम में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।”

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें और अधिक बढ़ती हैं, तो सरकार FCI (भारतीय खाद्य निगम) के भंडार से ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की आपूर्ति बढ़ा सकती है, ताकि खुदरा मूल्य को नियंत्रित रखा जा सके।

भविष्य की स्थिति पर अनुमान
– डिमांड: आने वाले हफ्तों में त्योहारों और खाद्य उद्योग की वजह से मांग मजबूत बनी रह सकती है।
– सप्लाई: यदि उत्तर प्रदेश, हरियाणा या पंजाब से आवक नहीं बढ़ी, तो कीमतों में और तेजी संभव है।
– खुदरा बाजार पर असर: यदि थोक दामों में बढ़त बनी रहती है, तो आटा और उससे जुड़े उत्पादों के रेट भी बढ़ सकते हैं।

कुलमिलाकर, फ्लोर मिलों की बढ़ती खरीद और मंडियों में कम आवक ने दिल्ली के गेहूं बाजार को समर्थन दिया है। यदि यह स्थिति कुछ और सप्ताह बनी रही, तो उपभोक्ताओं को खुदरा स्तर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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